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" यवनिका" -एक क्षणिका /अर्पणा शर्मा

खिंच जाएगी,
ड़ोरी सहसा,
थम जायेगी ,
ये कठपुतली,
भागते समय में निर्बाध,
यवनिका गिरेगी,
जीवन नाटक की,
और नैपथ्य में ,
गूँजेगी एक आवाज़,
कि अब तुम्हारा,
समय समाप्त ...!!"

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Arpana Sharma on June 8, 2017 at 11:28pm
आदरणीया कल्पना जी , आदरणीय श्रीमान् मोहम्मद आरीफ जी, श्रीमान् श्याम नारायण वर्मा जी, श्रीमान् नरेन्द्र सिंह जी, श्रीमान् आशीष यादव जी एवं श्रीमान् महेन्द्र कुमार जी - आप सभी ने मेरी क्षणिका पसंद कर मेरा उत्साह वर्धन किया , आप सभी का बहुत -बहुत आभार ।
Comment by Mahendra Kumar on June 5, 2017 at 7:40pm

बहुत बढ़िया प्रस्तुति है आ. अर्पणा जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by आशीष यादव on June 5, 2017 at 1:04pm

जीवन का अंतिम सत्य।  सुन्दर कृति। 

Comment by narendrasinh chauhan on June 3, 2017 at 5:26pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by Shyam Narain Verma on June 3, 2017 at 12:33pm
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई
Comment by Mohammed Arif on June 3, 2017 at 8:19am
आदरणीया अर्पणा जी आदाब, जीवन की निस्सारता को दर्शाती अच्छी कविता । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 3, 2017 at 6:59am

वाह | एक यथार्त क्षण | बहुत सुंदर रचना है आदरणीया अर्पणा जी | हार्दिक बधाई आपको |

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