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अनिश्चित भविष्य (कविता) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

कुण्ठित व्यथित
या हुए
व्यथित कुण्ठित !

विघटित संगठित
या हुए
संगठित विघटित !

अघटित घटित
या हुआ
घटित अघटित !

निश्चित अनिश्चित
या है
अनिश्चित निश्चित
भविष्य
देश का !

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Uma Vishwakarma on September 11, 2017 at 12:19pm

अच्छा सवाल है ? बधाई स्वीकार करें |

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 29, 2017 at 6:20am
मेरी इस काव्य रचना के अनुमोदन व हौसला अफजाई के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद् आदरणीय महेन्द्र कुमार जी।
Comment by Mahendra Kumar on April 6, 2017 at 11:58pm
आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी, बढ़िया वैचारिक कविता हुई है। मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।

कुण्ठित व्यथित
या हुए
व्यथित कुण्ठित?

विघटित संगठित
या हुए
संगठित विघटित?

अघटित घटित
या हुआ
घटित अघटित?

निश्चित अनिश्चित
या है
अनिश्चित निश्चित
भविष्य
अपने देश का?

सादर।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 6, 2017 at 10:10pm
मेरी इस ब्लोग-पोस्ट पर समय देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।
Comment by Neelam Upadhyaya on March 27, 2017 at 2:47pm

आदरणीय उस्मानी साहिब, देश की  वर्तमान दशा को दर्शाती सुंदर कविता । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 25, 2017 at 3:27pm
मेरी यह कविता आप जैसे नियमित पाठकों को भी पसंद आई, बहुत खुशी हुई। हौसला अफ़ज़ाई हेतु बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ साहब, जनाब तस्दीक़ अहमद खान साहब व जनाब मोहित मुक्त जी।
Comment by Mohit mishra (mukt) on March 20, 2017 at 9:17am

देस के वर्तमान को दर्शाती बेहतरीन प्रस्तुति | बधाई हो 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 19, 2017 at 7:33pm

मुहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी साहिब , अच्छा संदेश देती हुई सुंदर
लघु कविता के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---

Comment by Mohammed Arif on March 19, 2017 at 6:16pm
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, आज देश का भविष्य उहा-पोह की स्थिति में है । बहुत अच्छी लघु कविता में अपने भावों का अंकन किया आपने । बधाई क़ुबूल करें ।

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