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कब ख़ुद को मुख्तार करोगे

22/22/22/22

तूफाँ से गर प्यार करोगे,
बाहों को पतवार करोगे।

अब कर दो इज्हार-ए-मुहब्बत,
कब तक छुप छुप प्यार करोगे।

छोड़ोगे कब हुक़्म बजाना,
कब ख़ुद को मुख्तार करोगे।

पेश आएंगे सभी अदब में,
जब खुद शिष्ट आचार करोगे।

दरिया पार तभी होगा जब,
ज़र्फ़ अपना पतवार करोगे।

इश्क़ में' हद से' गुज़रने वालों,
तुम ख़ुद को बीमार करोगे।

शाम हुई फैला अँधियारा,
जाने कब इज़्हार* करोगे।
*चराग़ रौशन करना

ग़ज़ल मुक़म्मल तब ही होगी
ग़म को जब अश्आर करोगे।

इश्क़ में' पड़ कर "रोहित" तुम भी,
वक़्त अपना बेकार करोगे।
.
रोहिताश्व मिश्रा
(मौलिक एवम अप्रकाशित)

Views: 791

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Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 19, 2017 at 9:13pm
जी सर
हम ने वो बदल दिया
Thankuuuuuu
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 19, 2017 at 9:12pm
जी सर
बहुत बहुत शुक्रियः

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 19, 2017 at 9:04pm

आदरणीय रोहिताश्व भाई , अच्छी ग़ज़ल कही है , मुबारकबाद कुबूल कीजिये ।

आपने मिसरा बदल लिया है ... फिर भी जानकारी केलिये बता रहा हूँ --- जब दोनो शब्दों मे  मात्रा रहे तो ऐबे तनाफुर नही  होता -- जैसे

 अश्कों को ...  ये भी सही था ..  ।

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 19, 2017 at 3:28pm
बहुत बहुत शुक्रियः Mahendra भाइ जी
Comment by Mahendra Kumar on February 19, 2017 at 12:01pm
आदरणीय रोहिताश्व जी, इस बढ़िया ग़ज़ल के लिए आपको ढेरों बधाई। सादर।
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 18, 2017 at 9:20am

बहुत बहुत शुक्रियः आशुतोश भाई जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 18, 2017 at 2:25am
आदरणीय रोहिताश्व जी छोटी बहर में शानदार शेरो
की इस ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई सादर
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 16, 2017 at 7:42pm

बहुत बहुत शुक्रियः आरिफ भाई जी

Thanku....

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on February 16, 2017 at 7:40pm

बहुत बहुत शुक्रियः रवि भाई जी

हम उस मिस्रे के बारे में कुछ ओर सोचते हैं

Comment by Mohammed Arif on February 16, 2017 at 5:51pm
आदरणीय रोहिताश्व जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल करें । बह्र के बारे में गुणीजन राय देंगे ।

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