For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
करीब मुझ को' बुला रहा था।

वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स,
मगर दिये भी जला रहा था।

वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में,
न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।

सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर,
हमें मुहब्बत सिखा रहा था।

बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"।
नहीं तो' ये आईना रहा था।

रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबाद

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 209

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by surender insan on August 17, 2017 at 11:16am
जनाब रोहिताश्व मिश्रा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ जी।
Comment by vijay nikore on June 24, 2017 at 11:22am

अच्छी गज़ल के लिर बधाई।

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on April 23, 2017 at 10:11am
बहुत बहुत शुक्रियः सर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 23, 2017 at 9:49am

आदरणीय रोहिताश्व भाई , खूब सूरत गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on April 20, 2017 at 3:19pm
बहुत बहुत शुक्रियः रवि भाई जी
Comment by Ravi Shukla on April 20, 2017 at 1:25pm

आदरणीय रोहिताश्‍व जी अच्छी ग़ज़ल पेश की है आपने ..बधाई

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on April 20, 2017 at 9:46am

थैंक्यू ब्रजेश भाई जी
बहुत बहुत थैंक्यू

Comment by रोहिताश्व मिश्रा on April 20, 2017 at 9:46am

थैंक्यू ब्रजेश भाई जी
बहुत बहुत थैंक्यू

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 19, 2017 at 8:24pm
भाई रोहिताश्व जी बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल कही है..बधाई
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on April 19, 2017 at 8:19pm
जी सर
बहुत बहुत शुक्रियः
हम वो मिस्रा सही करते हैं

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० महेंद्र कुमार जी, ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया | "
13 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० दिनेश कुमार जी, ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया  "
14 minutes ago
Mohammed Arif commented on Rohit dobriyal"मल्हार"'s blog post ये कैसे हो गया
"प्रिय रोहित जी आदाब, अच्छी रचना । यह रचना आपने किस छांदसिक विधान में लिखी है, बताने का कष्ट करें?…"
14 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० राजनवादवी जी,  ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया. इस्स्लाह के लिए…"
15 minutes ago
Mohammed Arif commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वक़्त कुछ ऐसा मेरे साथ गुज़ारा उसने
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, बहुत ही मारक क्षमता वाली ग़ज़ल का तोहफ़ा दिया आपने । हर शे'र माक़ूल…"
17 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"जनाब अफरोज़ साहब ,ग़ज़ल  पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया "
19 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० सुशील सरना  जी ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया मेरा लेखन सार्थक हुआ "
20 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० मोहम्मद आरिफ जी ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया |"
21 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"फिर ख़ुशी में रुला गया हमको एक सफ़्हा किताब का तेरी   आद० समर भाई जी आपकी ये ग़ज़ल पुनः अभिभूत कर…"
24 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,सुन्दर गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
30 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,आपकी गज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
33 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब महेन्द्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
34 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service