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फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा

दौर-ए-जवानी के हमको रंगीन ज़माने याद आये
महफ़िल में यारों से वो साग़र टकराने याद आये

तन्हाई में भूले बिसरे सब अफ़साने याद आये
जिनमें ग़म की रातें गुज़रीं, वो मैख़ाने याद आये

दिल मुट्ठी में लेकर कोई भींच रहा यूँ लगता था
ग़म की काली रातों में जब ख़्वाब सुहाने याद आये

इक मुद्दत के बाद ख़ुशी ने दरवाज़े पर दस्तक दी
दिल घबराया और मुझे कुछ यार पुराने याद आये

सब कुछ खोकर बर्बादी के सहरा में जब जागे हम
अपनों की साज़िश के सारे ताने बाने याद आये

हमने देखा हर शाइर के होटों पर ये मिसरा था
"तुम याद आये और तुम्हारे साथ ज़माने याद आये"

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by rajesh kumari on January 18, 2017 at 1:22pm

सब कुछ खोकर बर्बादी के सहरा में जब जागे हम
अपनों की साज़िश के सारे ताने बाने याद आये---वाःह्ह्ह्ह वाह्ह्ह कमाल का शेर 

आद० समर भाई जी ,शानदार ग़ज़ल कही है बहुत खूब शेर दर शेर दाद कुबूलें 

Comment by Samar kabeer on January 17, 2017 at 4:08pm
जनाब राम आश्रय जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on January 17, 2017 at 4:07pm
जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल आपको पसंद आई लिखना सर्थक हुआ,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Ram Ashery on January 17, 2017 at 3:56pm

आपको बहुत बहुत बधाई इस खूब सूरत गजल के लिए 

Comment by रामबली गुप्ता on January 15, 2017 at 9:35pm
वाह वाह आद0 समर भाई साहब क्या कमाल की ग़ज़ल कही हर शेर ने दिल की गहराइयों को छुआ और इस शेर ने तो पूरे अंतर्मन को झकझोर दिया-
दिल मुट्ठी में लेकर कोई भींच रहा यूँ लगता था
गम की काली रातों में जब ख़्वाब सुहाने याद आये।
वाह वाह भाई साहब आकाश भर बधाई स्वीकारें।
Comment by Samar kabeer on January 7, 2017 at 2:34pm
जनाब विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by vijay nikore on January 7, 2017 at 11:34am

भाई समर कबीर जी, बहुत ही लाजवाब असरदार गज़ल लिखी है आपने।

किस-किस शेर को दाद दूँ .... 

// इक मुद्दत के बाद ख़ुशी ने दरवाज़े पर दस्तक दी
दिल घबराया और मुझे कुछ यार पुराने याद आये //

वाह, इतने खूबसूरत ख्याल ! 

ऐसी ज़ोरदार गज़ल साझा करने के लिए धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on January 6, 2017 at 9:49pm
जनाब सतविन्दर कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 6, 2017 at 4:47pm
आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमन!इस बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई।
Comment by Samar kabeer on December 29, 2016 at 11:19pm
जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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