For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं वज़ीर, वे चोर और सिपाही (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

भव्य ऐतिहासिक भवन। भवन में बस आग की ही लपटें। बाहर ऊपर की ओर उठता धुआँ ही धुआँ।
कराहते हुए भवन ने कहा- "अब मेरा मंत्री कौन?"

"मैं महाराज !" अपनी लपटों को लहराते हुए आग (वज़ीर) ने कहा।


"चोर और सिपाही का पता लगाओ!" भवन ने आदेश देते हुए कहा।

भवन के अंदर और बाहर चारों ओर फैलती आग ने ताप बढ़ाते हुए कहा- "चोर तो इस दुनिया के विकसित देश हैं, महाराज और सिपाही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है!"

"क्या मतलब?" दक्षिण एशिया रूपी महाराज भवन ने चौंकते हुए कहा।

"चौंकिये मत महाराज, मैं हूँ आतंकवाद!" हवा के तेज झौंके के साथ फैलती आग ने भवन को पुनः झुलसाते हुए कहा।

"तो फिर यह धुआँ क्या है?"

"आपका बाहरी विकास!" आग ने जवाब दिया।

[मौलिक व अप्रकाशित]

Views: 474

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2016 at 5:16pm
रचना पटल पर समय देकर अनुमोदन व स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी व आदरणीय सुरेश कुमार 'कल्याण' जी।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 21, 2016 at 9:55pm
ब्लोग पोस्ट रचना पटल पर उपस्थित होकर अनुमोदन व हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी व आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 18, 2016 at 10:53am
आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी साहब बिल्कुल यथार्थ सटीक व्यंग्य रचना।बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 17, 2016 at 9:30pm

वाह्ह्ह  आज के हालत पर बढिया कटाक्ष करती हुई बिम्बात्मक शैली के लिखी गई लघु कथा |दिल से बधाई लीजिये आद० शेख़ उस्मानी जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 16, 2016 at 10:37pm
सराहनीय प्रस्तुति, बधाई , आदरणीय शेख सहजाद उस्मानी जी , सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on October 16, 2016 at 4:44pm
सोचने को मजबूर करती बेहद खुबसूरत लघुकथा, आपको मेरी ह्रदय से बधाई मोहतरम शेख शहजाद उस्मानी साहब

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service