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कलाधर छन्द

शारदे समग्र काव्य में विचार भव्यता कि

सत्यता  उघार के  कुलीन भाव  मन्त्र दें।

शब्द शब्द  सावधान  अर्थ की  विवेचना

करें  विशुद्ध भाव से सुताल छन्द तंत्र दें।।

व्यग्रता  सुधार के विनम्रता  सुबुद्धि ज्ञान

मान के  समस्त  मानदण्ड  के  सुयंत्र  दें।

आप ही कमाल  वाह वाह की  विधायिनी

सुभाषिनी प्रवाह  गद्य पद्य में  स्वतन्त्र दें।।

मौलिक व अप्रकाशित

रचनाकार  . .केवल प्रसाद सत्यम

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 4, 2016 at 8:15am

हार्दिक आभार।  आ0 रामबली भाई जी,  सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 4, 2016 at 8:14am

आपका हृदयतल से आभार।  आदरणीया प्रतिभा जी,  सादर

Comment by रामबली गुप्ता on September 1, 2016 at 6:20pm
वाह वाह आद० केवल जी बहुत ही सुंदर छंद हुआ है। बधाई स्वीकार करें
Comment by pratibha pande on August 29, 2016 at 9:35am

 सुन्दर छंद रचना के लिए आपको बधाई आदरणीय

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 29, 2016 at 5:59am

आ0 समर कबीर भाई जी, आपका हृदयतल से हार्दिक आभार। आपकी स्नेह-छाँव यूँ ही बनी रहे। सादर

Comment by Samar kabeer on August 28, 2016 at 3:20pm
जनाब केवल प्रसाद जी आदाब,अच्छा लगा आपका छन्द,इस प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकार करें ।

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