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एक तुम्हारे होने से / कविता

साक्षी है सिंधू मन मेरा एक तुम्हारे होने से
हृदय की भित्तियों में चित्तियाँ तुम्हारे होने से

ऊँची काली दीवारें थाह पता कोई ना जाने
जीने -मरने में भेद मिटा संत्रासों के ढोने से
हृदय की भित्तियों में चित्तियाँ तुम्हारे होने से .......

उलट-पुलट है यह जग सारा पुरवाई भी व्याकुल है
लहरों की उछ्वासित साँसों को क्या मलाल अब खोने से
हृदय की भित्तियों में चित्तियाँ तुम्हारे होने से ........

लय की अनंतता में अंतर्मन का रमकर रमना
नित्य-निरंतर उसके गति में अविचलता के होने से
हृदय की भित्तियों में चित्तियाँ तुम्हारे होने से .........

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 12:10pm
हृदय से आभार आपका आदरणीया प्रतिभा जी रचना को मान देने के लिये।
Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 12:06pm
आदरणीय सौरभ जी,कोशिश कर रही हूँ आपकी कसौटी पर उतरने की ।मेरा लेखन उद्देश्य ही आपके द्वारा रचना को मान्यता मिलना होता है। कहती हूँ मैं उन लेखकों से जो पूर्ण संतुष्टि को जीते है कि पहले सौरभ जी से सार्थक प्रतिक्रिया लेकर आईये तो जानू । कहने का तात्पर्य यही है कि कसौटी हमेशा बेबाकपूर्ण ही होना चाहिये और मै निजी तौर पर आपकी इस बात की जबरदस्त कायल भी हूँ । अभिनंदन ।
Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 11:55am
लेखन पर आपकी उपस्थिती व पसंदगी के लिये तहेदिल आभार आपका आदरणीय समर कबीर जी।
Comment by kanta roy on August 4, 2016 at 11:54am
रचना को मान देने के लिये आभार आपका आदरणीय श्याम जी
Comment by Pawan Jain on August 2, 2016 at 11:21pm

भाव पूर्ण सुंदर रचना हेतु बधाई आदरणीय ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 2, 2016 at 10:28pm
वाह आदरणीया सखी दी ।बेहद भाव पूर्ण रचना ।हार्दिक बधाई ।
Comment by pratibha pande on August 2, 2016 at 8:21pm

ऊँची काली दीवारें थाह पता कोई ना जाने
जीने -मरने में भेद मिटा संत्रासों के ढोने से......वाह 
 ......
भावों भरा  ये  सुन्दर गीत  बहुत मोहक है  आपको हार्दिक बधाई आदरणीया कांता जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 2, 2016 at 7:36pm

बहुत बढ़िया .. वाह वाह ! भाव पक्ष को शब्दो का मुग्धकारी सहयोग मिला है. सर्वोपरि, आपका रचनाकर्म सार्थक ढंग से सम्मानित हुआ है, आदरणीया. वैसे, अबतक आपको और गहन हो जाना चाहिए. 

सादर

Comment by Samar kabeer on August 2, 2016 at 6:24pm
मोहतरमा कांता रॉय साहिबा आदाब,बहुत बढ़िया कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Shyam Narain Verma on August 2, 2016 at 11:02am
इस भावपूर्ण कविता के लिए हार्दिक बधाई .सादर 

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