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ग़ज़ल - वो बयान से खुद साबित कर देते हैं - ( गिरिराज भंडारी )

22   22  22   22   22   2


गदहा अन्दर हो जाये, तैयारी है

धोबी का रिश्ता लगता सरकारी है

 

वो बयान से खुद साबित कर देते हैं

जहनों में जो छिपा रखी बीमारी है

 

बात धर्म की आ जाये तो क्या बोलें ?

समझो भाई ! उनकी भी लाचारी है   

 

बम बन्दूकें बहुत छिपा के रक्खे हैं

अभी फटा जो, वो केवल त्यौहारी है

 

सरहद कब आड़े आयी है रिश्तों में

हमसे क्यूँ पूछो, क्यूँ उनसे यारी है ?

 

कभी फटा था धरती का सीना लेकिन

खूँ रिसना अब तक सीने से जारी है

 

तू जाने तेरी किताब की परिभाषा

मेरी किताब में लिक्खा है, गद्दारी है

 

अपनी माँ को माँ कहने की चाहत भी

मक्कारों को लगती है , मक्कारी है

*********************************
मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment by गिरिराज भंडारी on July 23, 2016 at 4:22pm

आदरणीय आशुतोष भाई , हौसला अफज़ाई का बहुत शुक्रिया ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 22, 2016 at 12:14pm

आदरणीय गिरिराज भाई साब ..आपकी इस क्रन्तिकारी रचना के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2016 at 10:28am

आदरणीय विजय भाई , गज़ल की सराहना और विचारों से सहमति के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 21, 2016 at 10:12am
हर शाख पे उल्लू बैठ चुके
अब आयी गधों की बारी है।
बहुत बहुत बधाई , आदरणीय गिरिराज भंडारी जी इस सटीक , सामयिक प्रस्तुति के लिए ,सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2016 at 9:51am

आदरणीया राजेश जी , ग़ज़ल की सराहना और सभी अशआर पसंद करने के लिये आपका हृदय से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2016 at 9:49am

आदरनीय समर भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।

आदरणीय ,  गदहा , गधा , और  खर  ये सभी सहीं है , हिन्दी  डिक्सनरी के हिसाब से  । शेर का अर्थ सीधे पहुँचे इसलिये गदहा लिया , वैसे  --  खर को अन्दर करने की  तैयारी है  -  मै कह सकता था ।  आगे आप सलाह दें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2016 at 9:44am

आदरणीय सुशील भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका । दो शे र पसंद करने के लिये आपका अलग से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2016 at 9:43am

आदरणीय अशोक भाई , गज़ल की सराहना और एक शे र पसंद करने के लिये आपका हृदय्से आभारी हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2016 at 9:22pm

बहुत बढ़िया  वाह्ह्ह वाह सही कटाक्ष ...

सभी शेर पसंद आये दिल से बधाई आपको आद० गिरिराज जी 

Comment by Samar kabeer on July 20, 2016 at 6:04pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई हे,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
कृपया "गधा"और गदहा' का फ़र्क़ समझाने का कष्ट करें ।

कृपया ध्यान दे...

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