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“अम्मा हो सकता है कि पुलिस आपसे भी पूछताछ करे I आपको बस इतना कहना है कि मै तो हफ्ते भर पहले ही आई हूँ यहाँ , कुछ ज्यादा नहीं जानती और .."  बेटा बोले जा रहा था पर सुमित्रा जी का दिमाग़ सुन्न था I

बेटे के यहाँ काम करने वाली बाई सीता ने कल रात पति से झगडे के बाद फाँसी लगा ली थीI

सुमित्रा जी दस दिन पहले ही बेटे के पास मुंबई आई थीं I  बेटे बहू के काम पर जाने के बाद सीता के साथ सुख दुःख की बातें चलती रहती थीं उनकीI परसों  बहू ने समझाया कि बाई से काम के अलावा ज्यादा बात चीत नहीं किया करें I बड़े शहर में ये सब नहीं चलता I

“क्या हुआ अम्मा ?आपको समझ आया जो इन्होने समझाया ?” बहू  ने कंधे झंक्झोरे उनके I

“हाँ ..हाँ वो .वो सीता दो दिन से परेशान लग रही थी “  सुमित्रा जी अपने में  बुद्बुदानें  लगीं:

“अगर मै पूछ लेती कि क्या हुआ .तो..तो शायद ..”I

मौलिक व् अप्रकाशित

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 27, 2016 at 5:13pm
'आत्महत्या करने' और 'आत्महत्या का कृत्य टलने' के मनोविज्ञान और शौध के अनुसार यही 'पल', यही कम्यूनिकेशन' बड़ा महत्वपूर्ण होता है। कुछ बेवकूफों व स्वार्थियों की वज़ह से पीड़ितों की ख़ुदकुशी टल नहीं पाती है, वरना हर घर में कोई तो मनोविज्ञानी जैसी सलाह दे सकता है। बहुत बढ़िया सारगर्भित संदेश वाहक रचना के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।
Comment by Sushil Sarna on June 27, 2016 at 4:38pm

अगर मै पूछ लेती कि क्या हुआ .तो..तो शायद ..”I
आ. प्रतिभा जी मन के द्वन्द का इस लघु कथा में आपने बहुत ही सुंदर चित्रण किया है। पांच लाइन शीर्षक को सार्थक करती है और कथा की गहनता की द्योतक है। इस सुंदर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया जी।

Comment by Harash Mahajan on June 27, 2016 at 2:37pm

बहुत ही सुंदर लघु कथा ...अंत बहुत ही गहरा रहा .....सुंदर पञ्च !! दाद !! आ० pratibha pande  जी !!

सादर !!

Comment by Rahila on June 27, 2016 at 1:12pm
सच है शायद बात कर लेती तो...।बहुत बेहतरीन रचना।लेखन ही सार्थक हो गया इस छुपे से संदेश से।खूब बधाई।सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 27, 2016 at 12:14pm

शीर्षक को  पूर्णतः  सार्थक करती  बहुत  अच्छी लघु कथा हुई कई बार हम वक़्त हाथ से निकलने पर पछताते रह जाते हैं |आज के बच्चे आज के माहौल को देखते हुए असम्वेदन शील हो गए हैं कौन पुलिस लाइन कोर्ट कचहरी के चक्कर काटना चाहता है |दो पीढ़ियों की सोच को बहुत सुन्दरता से शाब्दिक किया है |हार्दिक बधाई प्रिय प्रतिभा जी |

Comment by Shyam Narain Verma on June 27, 2016 at 11:11am

बहुत बढ़िया लघुकथा ,  हार्दिक बधाई स्वीकारें  सादर

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