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गीतिका (आनंदवर्धक छंद)

2122 2122 212
दो कदम आगे बढ़ा कर देखिये
अब जरा नजदीक आकर देखिये।1

जो सुलगती है रही तबसे यहाँ
आग वह फिर से जला कर देखिये।2

सोलहों आने खरा अपना कनक
जो लगे अब भी तपा कर देखिये।3

खनखनाता मैं रहा कितना कहूँ
अब नहीं फिर से बजा कर देखिये।4

देख लेंगे लोग बस डरते रहे
जी करे नजरें बचा कर देखिये।5

चल चुके अबतक बहुत जाने-जिगर
पग कभी मुझसे मिला कर देखिये।6

हो रहे हैं बेखबर फिर बेवजह
फासले कुछ तो मिटाकर देखिये।7

होंठ के माफिक रचा मैंने अभी
गीत मेरा गुनगुना कर देखिये।8

मुस्कुराते कह उठेंगे नामवर
राग कोई फिर उठाकर देखिये।

बंदिशों की रात का सिमटा सफर
भोर है घूँघट उठा कर देखिये।10

आँसुओं में धुल रही अपनी कथा
आइये फिर से लिखाकर देखिये।11

मुश्किलों में फूल खिलते जो कभी
कुछ पहर घर में सजा कर देखिये।12

मैं सदा चलता रहा करता 'मनन'
हो सके दिल में बिठाकर देखिये।13
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

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Comment

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Comment by Manan Kumar singh on June 30, 2016 at 10:37pm
आभार भाई।
Comment by कवि - राज बुन्दॆली on June 30, 2016 at 4:32pm

इस  सार्थक लयबद्ध गीतिका छंद  के  लिए् बधाई

Comment by Manan Kumar singh on June 15, 2016 at 11:23pm
आदरणीया कांता जी आभार आपका।
Comment by kanta roy on June 15, 2016 at 9:05pm

आनंदवर्धक छंद पहली  बार  पढने  में  आया   है . जो  भी  है  पढ़कर  वास्तव  में मन  आनंद छाया है . बधाई आपको  आदरणीय  मनन  कुमार  जी  इस  सार्थक लयबद्ध गीतिका छंद  के  लिए 

Comment by Manan Kumar singh on June 15, 2016 at 7:36pm
आभार आ. श्याम नारायण जी।
Comment by Manan Kumar singh on June 15, 2016 at 7:34pm
आभार आ. गिरिराज भाई।
Comment by Manan Kumar singh on June 15, 2016 at 7:34pm
आभार आ. गिरिराज भाई।
Comment by Shyam Narain Verma on June 15, 2016 at 5:41pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 15, 2016 at 5:22pm

आदरनीय मनन भाई , अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें । मिसरों मे मात्रा मिलाने के लिये शब्दों का जितना कम उलट फेर होगा , मिसरा उतना अच्छा लगेगा । बात सीधी कहने का प्रयत्न होना चाहिये । एक सामान्य सलाह समझियेगा ।

Comment by Manan Kumar singh on June 14, 2016 at 8:18pm
हौसला आफजाई के लिए आपका आभारी हूँ आदरणीय उस्मानी जी।

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