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गजल छंद-दिक्पाल/मृदुगति
मापनी221 2122 221 2122
होता वही कभी जो चाहा किया समय है
होता रहा कभी जो करता चला समय है।
चाहा बहुत कि मोडूँ उलटा चलन हुआ कब
मानी न ही कभी तो उसने बड़ा समय है।
खूबी रही वही हाँ ना की अभी कहूँ तो
छू ले गगन अभी वो सीढ़ी लगा समय है।
चाहा उसे बना दूँ अवतार नज्म का मैं,
उड़ती रही घटा सी हर पल रहा समय है।
उसकी अदा नफीसी कैसे करूँ बयाँ मैं,
नजरें बचा नजर कर लेती फिरा समय है।
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by मनोज अहसास on September 17, 2015 at 9:01pm
आदरणीय मनन कुमार सिंह सर जी
मैं पूर्व की टिप्पणी की क्षमा चाहता हूँ
मुझमे इतनी योग्यता नहीं है
आप कृपिया अन्यथा न लेकर मुझे क्षमा कर दें
सादर
Comment by Manan Kumar singh on September 17, 2015 at 8:55pm
आदरणीय मनोज जी,आपकी रूचि और गुणग्राहकता सराहनीय है,योग्यता भी रखते हैं;जहाँ तक शेर दर शेर की समीक्षा की बात है तो यदि आप ही करें तो बेहतर ।
Comment by मनोज अहसास on September 12, 2015 at 9:53pm
नमस्कार आदरणीय
अब इतने ज्ञानी गुणी ग़ज़लकारों ने जब इसे बहुत खूब ग़ज़ल कह दिया है तो इसमें किसी तरह का दोष हो पाना संभव नहीं है
पर मुझे इस ग़ज़ल के भाव समझ नहीं आते
शब्दों को जिस ढंग से आपने गूँथा है लगता है बहर की मात्राएँ गिनकर शब्द की मात्राएँ गिनकर समायोजन किया गया है
गुस्ताखी के लिए माफ़ी सर
पर किसी योग्य ग़ज़लकार द्वारा शेर दर शेर इस ग़ज़ल की समीक्षा हो जाय
तो मुझे भी भाव स्पष्ट हो जायेगे के बहुत बढ़िया ग़ज़ल है
वैसे ये बात बिना कहे भी रह सकता था परंतु ग़ज़ल सीखने के क्रम में मुझे गुरुजनों का आदेश है कि कोई बात समझ न आये तो पूछी जाये
अपना अनुज समझकर यदि आप इस ग़ज़ल को समझा दें तो कृपा होगी
आशा है आप अनयथा नहीं लेंगे
सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on September 11, 2015 at 2:35pm

बढ़िया प्रयास हुआ है ... बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on September 10, 2015 at 11:35pm
प्रयासरत रहें।।शुभ शुभ
Comment by Samar kabeer on September 10, 2015 at 10:45pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी,आदाब,इस सुन्दर प्रयास हेतु बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 10, 2015 at 9:17pm

आदरणीय मनन भाई , गज़ल का बहुत सुन्दर प्रयास हुआ है , आपको दिली बधाइयाँ ।

Comment by Manan Kumar singh on September 10, 2015 at 8:11pm
सादर शकूर जी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 10, 2015 at 6:12pm
अच्छा प्रयास है आदरणीय मनन जी

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