For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : लब-ओ-अरिज़ की, वफ़ा और जफ़ा की बातें

लब-ओ-अरिज़ की, वफ़ा और जफ़ा की बातें
नाज़-ए-महबूब की, क़ामत की, अदा की बातें
.
जलव-ए-वस्ल की, फुरक़त की,सज़ा की बातें
दिल-ए-बेहोश, फिर एक होशरुबा की बातें
.
हैं कहाँ इश्क़-ओ-वफ़ा , दर्द-ओ-दवा की बातें 
हैं फ़क़त सूद-ओ-ज़ियाँ , बुग्ज़-ओ-अना की बातें
.
हाल-ए-दिल हम ने सुनाया तो ज़रा बात चली
हाल-ए-दिल तुम भी सुनाओ , तो हों बाक़ी बातें
.
बुरा कहता है ज़माना , तो कहे ना , सालिम
उम्र भर हमने कहाँ, किसकी ,सुना की बातें ?
   -सालिम शेख 
''मौलिक एवं अप्रकाशित ''

Views: 999

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 5, 2015 at 7:27pm

आ० भाई बहुत ज्यादा बातें तो मुझे नही पता मै भी सिख रहा हूँ...हाँ मेरा कवाफी को लेकर कहना इसी मिसरे पर था....//हाल-ए-दिल तुम भी सुनाओ , तो हों बाक़ी बातें//...आपकी गज़ल में जहाँ तक मै समझ पा रहा हूँ मतले में काफ़िया 'अआ' पर बंधा है

लब-ओ-अरिज़ की, वफ़ा और जफ़ा की बातें
नाज़-ए-महबूब की, क़ामत की, अदा की बातें

इस अनुसार उक्त मिसरे में शायद काफिया दोष आ रहा है!

बाकी आ० सौरभ सर की बातों पर अवश्य ध्यान दें!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 5, 2015 at 10:46am

इस सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ..भाई सालिम जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 4, 2015 at 11:04pm

भाई सालिम शेख, आपकी ग़ज़ल के मिसरे इस वज़न पर मालूम होते हैं - 2122 / 1122 / 1122  / 22 (112) 

मैं आपकी ग़ज़लों के शेरको देख कर ऐसा समझ रहा हूँ. आप इस वज़न पर अपनी ग़ज़ल के मिसरों को बाँधें. यही सही कोशिश कहलायेगी. वर्ना लाख उम्दा कहन हो, अगर सही ढंग से मिसरों का बाँधना न हुआ सारी कोशिश कूड़ा ही मानी जाती है. 

विश्वास है, आप मेरे कहे का अर्थ समझ रहे हैं. 

शुभेच्छाएँ

Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 10:35pm

आदरणीय  Manoj kumar Ahsaas जी , ग़ज़ल में कम-अज़-कम  पांच ही अशआर का होना ज़रूरी होता है ,  दो शेर और जोड़ने से आपका आशय मैं समझा नहीं , कृप्या समझाने का कष्ट करें , सादर 

Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 10:31pm

आदरणीय Harash Mahajan साहब , बेहद शुक्रिया 

Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 10:31pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी , मैंने ''आ'' को बतौर काफ़िया इस्तेमाल किया है और ''की बातें '' बतौर रदीफ़ , अगर कहीं ग़लती हो तो राहनुमाई फरमाएं , सादर

Comment by Harash Mahajan on August 4, 2015 at 10:20pm

आदरणीय saalim sheikh जी अच्छे अहसासों से लबरेज़ है आपकी कृति |

हाल-ए-दिल हम ने सुनाया तो ज़रा बात चली
हाल-ए-दिल तुम भी सुनाओ , तो हों बाक़ी बातें......बहुत खूब !!
Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 10:13pm

krishna mishra 'jaan'gorakhpuri भाई ,एक बार फिर से शुक्रिया , जहाँ तक काफ़िये की बात है  अगर आप इस मिसरे  की बात कर रहे हैं '' हाल-ए-दिल तुम भी सुनाओ , तो हों बाक़ी बातें'' 

तो इसमें काफ़ और क़ाफ़ का फ़र्क है जो मेरे ख्याल से जायज़ है , अगर नहीं है , या आप किसी और मिसरे की बात कर रहे हैं तो कृप्या मार्गदर्शन करें , सादर  

Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 10:07pm

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी , मिथिलेश वामनकर जी और krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी 

आप सभी का बेहद बेहद  शुक्रिया , मुझे बह्र का ज्यादा इल्म नहीं है (कोशिश जारी है )  इसलिए मैं इस बह्र का नाम बताने से क़ासिर हूँ 

लेकिन मैंने जिस बह्र या दरअसल लय के आधार पर ये ग़ज़ल कही है , वो अजमल सुल्तानपुरी साहब की ये नज़्म है 

''मैं तेरा शाहजहाँ तू मेरी मुमताज़ महल

आ तुझे प्यार की अनमोल निशानी दे दूँ ''

अगर आप में से कोई इस बह्र के नाम से वाकिफ़ हो तो यहाँ लिखने का कष्ट करें 

Comment by saalim sheikh on August 4, 2015 at 9:51pm

आदरणीय Sushil Sarna जी , बेहद शुक्रिया 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
14 hours ago
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service