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2122- 2122- 212

ख़्वाब से डरने लगा हूँ इन दिनों

नींद से मैं भागता हूँ इन दिनों

 

धड़कनें हैं तेज़ राहें पुरख़तर

मैं सँभलकर चल रहा हूँ इन दिनों

 

वुसअते शब बेबसी तन्हाइयाँ

इन अज़ाबों से घिरा हूँ इन दिनों

 

मुझपे भारी है हर इक लम्हा बहुत

फिक्र की तह में दबा हूँ इन दिनों

 

आइना हटकर परे मुझसे कहे

पत्थरों सा हो गया हूँ इन दिनों

 

कोई बतलाये मुझे मैं कौन हूँ

पहले क्या था और क्या हूँ इन दिनों

 

बदहवासी बेख़याली में “शकूर”

राहे फ़र्दा ढूँढता हूँ इन दिनों

 

-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2015 at 9:03am

आदरणीय हरिप्रकाश दूबे सर उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2015 at 9:02am

आदरणीय श्याम मठपाल जी आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2015 at 9:02am

आदरणीय लक्ष्मणजी आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by maharshi tripathi on March 12, 2015 at 11:54pm

आ. शिज्जू जी कृपया कुछ शब्दों के अर्थ बताएं  ,,जिससे मुझे समझने में आसानी हो ,,,जैसे वुसअते,अज़ाबों ,पुरख़तर,,,,,बाकी पंक्तियाँ कमाल  की हैं ,,बधाई |

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 12, 2015 at 4:53pm
ख़्वाब से डरने लगा हूँ इन दिनों
नींद से मैं भागता हूँ इन दिनों
बहुत खूब , सुन्दर प्रस्तुति, आदरणीय शिज्जु शकूर जी , बधाई, सादर।
Comment by Shyam Narain Verma on March 12, 2015 at 4:27pm
सुन्दर ग़ज़ल हेतु बधाई
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 12, 2015 at 4:27pm

आइना हटकर परे मुझसे कहे

पत्थरों सा हो गया हूँ इन दिनों

कोई बतलाये मुझे मैं कौन हूँ

पहले क्या था और क्या हूँ इन दिनों

 सुन्दर ग़ज़ल पर हार्दिक बधाईयाँ! आ० शिज्जू सर!

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 12, 2015 at 3:59pm
अच्छे अश’आर हुए हैं शिज्जू जी, दाद कुबूल कीजिए
Comment by Hari Prakash Dubey on March 12, 2015 at 2:49pm

आदरणीय शिज्जु "शकूर" सर लाजवाब ग़ज़ल है हार्दिक बधाई ! सादर
ख़्वाब से डरने लगा हूँ इन दिनों
नींद से मैं भागता हूँ इन दिनों.....वाह
आइना हटकर परे मुझसे कहे
पत्थरों सा हो गया हूँ इन दिनों ...बहुत खूब
कोई बतलाये मुझे मैं कौन हूँ
पहले क्या था और क्या हूँ इन दिनों...लाजवाब

Comment by Shyam Mathpal on March 12, 2015 at 2:27pm

Aadarniya shijuu Shakur Ji,

Sundar Gazal ki liye bahut badhai. Aabhar.

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