For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लोग(समीक्षार्थ गज़ल प्रयास )

मन के कितने छोटे लोग

रहते क्या-क्या ओटे लोग

गंद डालकर चिल्लाते हैं

जितने भी हैं खोटे लोग

मन की नंगाई ना छोड़ें

लड़ते पहन लंगोटे लोग

टोटे वालों को खोटा बोलें

जो हैं मन के खोटे लोग

नाक़ाबिल परवान चढ़ रहे

तब्दीले-सूरत में कोटे लोग

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 487

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by somesh kumar on March 2, 2015 at 11:46pm

शुक्रिया गिरिराज सर ,विश्लेषात्मक मार्गदर्शन के लिए हृदय से आभार |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 2, 2015 at 1:22pm

प्रिय सोमेश

आपका प्रयास अच्छा है  i इस मंच से आपको दिशा मिलती रहेगी  i आगे आप कोशिश तो करेंगे ही  i स्स्नेह i

Comment by Hari Prakash Dubey on March 2, 2015 at 12:45pm

 सोमेश भाई सुन्दर रचना , सुन्दर प्रयास , हार्दिक बधाई आपको !सादर

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 1, 2015 at 10:31pm

ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई। शेष आदरणीय गिरिराज सर ने तो कह ही दिया है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 1, 2015 at 9:13pm

आदरणीय  सोमेश भाई , मेरे ख्याल से आप इस ग़ज़ल को  22  22  22  2 बहर मे कहना चाह रहे थे , कुछ मिसरे बहर से भटक गये हैं , मात्रा अधिक है , सुधारने का प्रयास कर रहा हूँ --

मन के कितने छोटे लोग     ---मन के कितने छोटे लोग     ---

रहते क्या-क्या ओटे लोग --    रहते क्या-क्या ओटे लोग

गंद डालकर चिल्लाते हैं  ----- गंद ड़ाल कर चिल्लाते  

जितने भी हैं खोटे लोग --------जितने भी हैं छोटे लोग       

मन की नंगाई ना छोड़ें ---------मन नंगाई ना छोड़े

लड़ते पहन लंगोटे लोग ------  लड़ते पहन लंगोटे लोग   ( ते की मात्रा गिरानी पड़ रही है  )

टोटे वालों को खोटा बोलें ----   टोटों को बोले खोटा

जो हैं मन के खोटे लोग -----   जो हैं मन के खोटे  लोग

नाक़ाबिल परवान चढ़ रहे --   नाक़ाबिल परवान चढ़े

तब्दीले-सूरत में कोटे लोग  -- बदलें सूरत, कोटे लोग

आदरणीय सोमेश भाई , ग़ज़ल के सफल प्र्यास के लिये हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by somesh kumar on March 1, 2015 at 8:20pm

उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का शुक्रिया |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 1, 2015 at 7:52pm

सुंदर है 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 1, 2015 at 7:26pm
प्रयास अच्छा है, बधाई , आदरणीय सोमेश कुमार जी, सादर।
Comment by maharshi tripathi on March 1, 2015 at 7:09pm

अच्छी रचना पर आपको बधाई आ.सोमेश जी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
9 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
23 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service