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॥ मै ईश्वर नहीं ॥ अतुकांत रचना ( गिरिराज भंडारी )

॥ मै ईश्वर नहीं ॥
**********
मै ईश्वर नहीं
किसी ईश्वरीय व्यवहार की उम्मीदें न लगायें
मै तो क्या कोई भी चाहे तो ईश्वर नहीं हो सकता

बस दूसरों में ईश्वरीय गुण खोजने में लगे रहते हैं
हम , आप , सब

इसलिये, आज
ये ऐलान है मेरा ,
मुझमें केवल इंसानी गुण ही हैं
अच्छों से उनसे अधिक अच्छा
बुरों से भरसक बुरा

उनके व्यवहार के प्रत्युत्तर में भेज रहा हूँ
कुछ दिल से निकली मौन गालियाँ
कुछ आत्मा से निकली बद दुआयें
जिसमें नत्थी है उनके व्यवहार की
एक छाया प्रति

इस सीख के साथ ,
क़समें खिला के ,
कि अगर अस्वीकृत कर दिये गये तो वापस न लौटें
घूमते रहें वहीं कहीं
आसपास ,
किसी मौके की तलाश में
उनके दिलो दिमाग मे घुस जाने के लिये
जिसके कि वो हक़दार हैं
******************
मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 13, 2015 at 4:04pm

आदरणीय गिरिराज भाईसाब 

उनके व्यवहार के प्रत्युत्तर में भेज रहा हूँ 
कुछ दिल से निकली मौन गालियाँ 
कुछ आत्मा से निकली बद दुआयें 
जिसमें नत्थी है उनके व्यवहार की 
एक छाया प्रति..क्या बात है ..इस शानदार रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2015 at 7:55am

आदरणीय बड़े भाई , गोपाल जी , आपकी स्नेहिल सराहना के लिये आभारी हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 13, 2015 at 7:46am

आदरणीया राजेश जी , रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 12, 2015 at 11:49am

अनुज

क्या बात है i अति सुन्दर i  सादर i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 12, 2015 at 11:08am

वाह शब्द और भाव लक्ष्य भेदी बाण की तरह ...सफलता मिलेगी ही ,बहुत सुन्दर प्रस्तुति दिल से बधाई आपको| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 12, 2015 at 7:55am

आदरणीय खुर्शीद भाई , रचना की सराहना के लिये आपका बहुत आभार ।

Comment by khursheed khairadi on February 12, 2015 at 12:50am

कि अगर अस्वीकृत कर दिये गये तो वापस न लौटें 
घूमते रहें वहीं कहीं 
आसपास , 
किसी मौके की तलाश में 
उनके दिलो दिमाग मे घुस जाने के लिये 
जिसके कि वो हक़दार हैं 

आदरणीय गिरिराज सर ,सुन्दर प्रस्तुति है |सादर अभिनन्दन |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 11, 2015 at 12:47pm

आदरणीया उषा जी , हौसला अफज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।

Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 11, 2015 at 9:10am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, अति सुन्दर रचना के लिए बधाई। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 11, 2015 at 8:38am

आदरणीय समर भाई , हौसला अफज़ाई का दिली शुक्रिया ॥

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