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कुछ तो आपस मे बनी रहने दे .............

कुछ तो आपस मे बनी रहने दे
आसमाँ तेरा सही मेरी ज़मीं रहने दे

बिछड़ के होगा तुझे अफ़सोस इस खातिर
अपनी आँखों में नमी रहने दे

मिल गया तू मुझे , तो फिर क्या होगा
मेरे मौला ये कमी रहने दे

मेरे ईमान की आँखें बे-नूर हो जाएँ
तरक़्क़ी तू मुझे ऐसी रोशिनी रहने दे

गैरों पे यक़ीन करना पड़े , "अजय"
तू मुझसे ऐसी दुश्‍मनी रहने दे

अजय कुमार शर्मा
मौलिक & अप्रकाशित

Views: 579

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 6, 2015 at 11:21am

आदरणीय अजय भाई , अच्छी रचना की है , बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 6, 2015 at 1:43am

आदरणीय अजय जी इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ...

कुछ तो आपस मे बनी रहने दे 
आसमाँ तेरा सही मेरी ज़मीं रहने दे.... बहुत खूब 

Comment by ajay sharma on February 5, 2015 at 11:59pm

sabhi gurjano ka hridayatal ki gahrayio se dhnayawad 

Comment by मोहन बेगोवाल on February 5, 2015 at 9:59pm

  उम्दा रचना कही आप जी ने बधाई हो 

गैरों पे यक़ीन करना पड़े , "अजय" 
तू मुझसे ऐसी दुश्‍मनी रहने दे -कमाल का मक्ता 

Comment by Anurag Goel on February 5, 2015 at 5:36pm

सुन्दर रचना और भाव 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 5, 2015 at 2:50pm

 आदरणीय अजय कुमार शर्मा जी सुन्दर रचना ...मिल गया तू मुझे , तो फिर क्या होगा 
मेरे मौला ये कमी रहने दे.....इन पंक्तियों पर विशेष बधाई !

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 5, 2015 at 12:57pm

आ० अजय भाई , अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई .

Comment by savitamishra on February 5, 2015 at 11:15am

बहुत खूब

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 5, 2015 at 10:38am
गैरों पे यक़ीन करना पड़े , "अजय"
तू मुझसे ऐसी दुश्‍मनी रहने दे
खूब, बहुत खूब, आदरणीय अजय शर्मा जी, बधाई, सादर।

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