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“भारतीय कुत्ता” (लघुकथा)

“अरे यार ओबामा साहब के रास्ते में कुत्ता आ गया, सुरक्षा व्यवस्था में भयंकर चूक हो गयी, अगर उसमें बम लगा होता तो?”

“कुछ नहीं यार “भारतीय कुत्ता” था, जान दे देता पर ओबामा साहब को कुछ नहीं होने देता, यार देश की इज्ज़त का सवाल था आखिर ।" जय हिन्द !

 

हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 29, 2015 at 9:20am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 29, 2015 at 9:20am

आदरणीय वीरेन्द्र मेहता जी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 28, 2015 at 8:29pm

गुरुदेव आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव सर ,रचना पर आपकी उपस्थिति  और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार ! सादर !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 28, 2015 at 8:23pm

हरि प्रकाश जी

मुझे आपकी कथा अच्छी लगी i सादर i

Comment by Hari Prakash Dubey on January 28, 2015 at 7:54pm

आदरणीया राजेश  कुमारी जी रचना पर आपकी उपस्थिति  और आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ! सादर !

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on January 28, 2015 at 6:05pm

sundar do - teen pankatiyo me hi bahut kuch kah diya.....Athithay....Wafaa aur Surkasha vayavastha.....

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 28, 2015 at 11:58am

इस लघु कथा के लिए कोटि कोटि नमन 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 28, 2015 at 11:12am

अच्छी सामयिक लघु कथा ... जानवर तक किसी का अहित नहीं कर सकते उस पर अतिथि देवो भवः ...वाले देश में जन्मे तो बिलकुल नहीं . हार्दिक बधाई हरी प्रकाश जी 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 28, 2015 at 9:13am

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु  सादर धन्यवाद ! 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 28, 2015 at 1:13am
जिक्र जब भी वफ़ा का होता है ,
कुत्ते का जिक्र जरूर होता है।
बात वफादारी की हो , सुरक्षा - कवच
के अंदर भी कुत्ता पहुंचा होता है।
बधाई, आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , सादर।

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