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"संघर्ष में आनंद"

संघर्ष,

कहीं भी हो ,

कैसा भी हो,

होता, बहुत  बुरा है ,

बहुत तड़पाता है,

काटता है ,

दुधारा छुरा है !

 

लेकिन,

संघर्ष न हो ,

तो सूख जाता है ,

मन का चमन ,

हर हाल में,हरा रखे ,

आदमी को,

संघर्ष वो सुरा है !

 

डरता,

जो पीने से ,

संघर्ष के,

छलकते हुए पैमाने ,

उस आदमी का जीवन,

बड़ा बेरंग,

बड़ा बेसुरा है !

 

लड़ता ,

हर आदमी है,

अपनी लड़ाई ,

अपने ही अंदाज़ में,

मगर लड़ता है जो ,

संघर्ष के साथ ,

वही रण बांकुरा है !

 

 

आप भी ,

घबराइये मत ,

संघर्ष में, आनंद खोजीये,

क्योंकि जिंदगी,

घूमती है,

जिसके चारों तरफ

संघर्ष वो धुरा है !

 

अब ,

हर चोट पर ,

मेरा साहस और बढ़ जाता है ,

हर असफलता पर मेरा उत्साह ,

दुगना हो जाता है ,

मैंने संघर्ष में आनंद खोज लिया है,

मेरा हर पल आनंद से गुजर जाता है !

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित”

 

 

Views: 796

Comment

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 29, 2015 at 5:42pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर , प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 28, 2015 at 9:24am

आदरणीय गिरिराज सर, प्रेरणादायी टिप्पणी के लिए हृदय से धन्यवाद आभार।सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 28, 2015 at 9:22am

शिशिर जी ,आपका धन्यवाद ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on January 27, 2015 at 8:20pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आपकी प्रतिक्रिया से उत्साह मिला आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 27, 2015 at 7:57am

आदरणीय हरि प्रकाश भाई , बहुत सुन्दर प्रेरणा दायी  रचना हुई है , सच तो है जीवन का दूसरा नाम ही  संघर्ष है । आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 27, 2015 at 7:36am
बहुत सुन्दर विचार। प्रेरक। बधाई , आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी, सादर।
Comment by Shishir Dwivedi on January 26, 2015 at 9:35pm
बहुत सुन्दर कविता है

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 26, 2015 at 9:28pm

आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी सकारात्मक और प्रेरित करती बेहतरीन कविता... छोटी छोटी पंक्तियों में कमाल के भाव उभरकर आये है. ये पंक्तियाँ बेहतरीन और गहरे तक प्रभावित करती है-

मैंने संघर्ष में आनंद खोज लिया है,

मेरा हर पल आनंद से गुजर जाता है !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 26, 2015 at 7:27pm

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया सर, आपके प्रेरणादायक शब्दों के लिए आपका हार्दिक आभार ,गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें" ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 26, 2015 at 6:47pm

सोमेश भाई उत्साहवर्द्धन के लिए सादर धन्यवाद !

कृपया ध्यान दे...

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