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" हँसकर पतवार चलाना रे "

सुख-दुःख तो आते जाते हैं................................... 

सुख-दुःख तो आते जाते हैं,  राही मत घबरा जाना रे !

जीवन की गहरी नदियाँ में, हँसकर पतवार चलाना रे !

 

हमने कुछ देखी रीत यहाँ,..................................

हमने कुछ देखी रीत यहाँ, श्रम से ही सब कुछ मिलता है !

ईमान –धरम के काँटों में, तब फूल मुकद्दर खिलता है !

 

दौलत तो आनी जानी है.................................

दौलत तो आनी जानी है, ना मन इसमें उलझाना रे !

जीवन की गहरी नदियाँ में, हँसकर पतवार चलाना रे !

 

ये पाप - पुण्य है खेल यहाँ,..................................

ये पाप - पुण्य है खेल यहाँ, जो करता है सो भरता है !

जो सत की राह चले वो तो, इस भवसागर से तरता है !

 

सारे बंधन हैं स्वप्न यहाँ..................................

सारे बंधन हैं स्वप्न यहाँ, मत जीवन व्यर्थ गवाँना रे !

जीवन की गहरी नदियाँ में, हँसकर पतवार चलाना रे !

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित”

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 26, 2015 at 12:33pm

सोमेश भाई , बहुत - बहुत धन्यवाद आपका !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 26, 2015 at 12:33pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी, रचना पर आपके उत्साहवर्द्धन के लिए  धन्यवाद ,आपका हार्दिक आभार ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 8:20pm

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा त्रिपाठी जी !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 8:18pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी सर !

Comment by somesh kumar on January 22, 2015 at 11:37am

सुंदर गीत ,सुंदर भाव |बधाई इस मनोहरी रचना पर |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 22, 2015 at 11:14am

हँसते हँसते जीनें का सन्देश देती सुंदर गीत  रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री हरी प्रकाश दुबे जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 22, 2015 at 8:13am

लाजवाब गीत रचना हुई है , आदरणीय हरि भाई , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 21, 2015 at 9:54pm

आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर, सादर !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 21, 2015 at 9:38pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on January 21, 2015 at 9:21pm

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया सर उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु  आपका हार्दिक आभार ! सादर 

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