For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फंस गया चुंगल में जब शैतान के
हौसले बढने लगे इंसान के

तुमसे ये लग़ज़िश न हो जाए कहीं
हम बहुत पछताए दिल की मान के

उन से कह दो छोड़ दें भारत मिरा
लोग जो हामी हैं पाकिस्तान के

आप क्यूं ज़हमत उठाते हैं जनाब
ख़ुद ही दुश्मन हैं हम अपनी जान के

फ़िक्र उक़्बा की न दुनिया का ख़याल
सो गए ग़फ़लत की चादर तान के

बरकतें होने लगीं नाज़िल "समर"
पाँव घर में क्या पड़े महमान के

समर कबीर /मौलिक रचना अप्रकाशित

Views: 768

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on January 26, 2015 at 2:38pm
जनाब ख़ुरशीद भाई,जनाब गोपाल नारायन जी, जनाब हरी प्रकाश दुबे जी,आदाब, ग़ज़ल पसंद करने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया!
Comment by khursheed khairadi on January 26, 2015 at 1:18pm

फ़िक्र उक़्बा की न दुनिया का ख़याल
सो गए ग़फ़लत की चादर तान के

आदरणीय कबीर साहब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |मतले में शायद आप कबीर की उलटबांसियों सी कोई व्यंजना रखना चाह रहें हैं ,मगर ग़ज़ल आम समझ की होने पर ही दिल के करीब लगती है |आदरणीय गिरिराज सर और शिज्जु सर की तरह मैं भी मतले के साथ थोड़ा असहज हूं ,बाकि अशहार लासानी है |सादर अभिनन्दन 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:58pm

बरकतें होने लगीं नाज़िल "समर"
पाँव घर में क्या पड़े महमान के----------------वाह----वाह------ कबीर साहेब i

Comment by Hari Prakash Dubey on January 26, 2015 at 11:18am

आदरणीय समर कबीर जी,

आप क्यूं ज़हमत उठाते हैं जनाब

ख़ुद ही दुश्मन हैं हम अपनी जान के.....बहुत खूब , हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 26, 2015 at 11:15am

आदरणीय समर कबीर जी ग़ज़ल पर  दिली दाद कुबूल फरमाएं। ग़ज़ल का मतला बार बार पढ़ा, मिसरों में रब्त करने की दिलो-जां से कोशिश की और अजीब निष्कर्ष पर पहुँचा कि यह एक नाकारे आदमी पर व्यंग्य है जिसका हौसला बिना शैतान के चुंगल में गए बढ़ता ही नहीं. यानी हौसला बढ़ाना है तो शैतान के चुंगल में जाना अनिवार्य शर्त है. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 26, 2015 at 10:30am

आदरणीय समर कबीर भाई , मैने समझ के लिये आम शब्द उपयोग किया था , आपने आम को आदमी के साथ जोड़ कर जवाब दे दिया , जिसमे मेरे लिये एक प्रश्न भी शामिल है । जवाब का केंन्द्रीय भाव जो मै समझ सका हूँ , उसके बाद और कुछ मेरे कहने के लिये जगह नहीं  खोज पा रहा हूँ । अतः बाक़ी सब शुभ शुभ और आपको हार्दिक शुभ कामनायें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 26, 2015 at 7:38am

आदरणीय समर साहब लाजवाब ग़ज़ल है दिली दाद हाज़िर है। लेकिन मतले में थोड़ा उलझ गया हूँ दोनों मिसरों में रब्त तो मेरे समझ में भी नहीं आया।

Comment by Samar kabeer on January 25, 2015 at 10:36pm
श्रीमान गिरिराज भंडारी जी ,आदाब आप आम आदमी की तरह सोच रहे हैं जैसा कि आपने ख़ुद फरमाया है,
अब एक बार इस मतले को एक शाईर की नज़र से देखिये और थोड़ा सा ग़ौर कीजिये और फिर मुझे बताईये कि क्या अब भी मतला कमज़ोर लग रहा है ?

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 25, 2015 at 9:37pm

आदरणीय समर कबीर भाई , मतला छोड़ बाक़ी गज़ल पहुर खूब सूरत कही है , दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।  

मतले में सोचने वाली बात ये है ( मेरी समझ में ) कि , शैतान के चुंगल में आने के बाद इंसान का हौसला बढ़ेगा या घटेगा । आम समझ ये कहती है कि , शैतानी चुंगल में इंसान का हौसला घटेगा , आपने मिसरा ए सानी मे हौसला बढ़्ने की बात की है , मेरे ख्याल से इसी लिये मतला कमज़ोर लग रहा है । एक बार सोच के अवश्य देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service