For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल --२१२२--२१२२--२१२ समझा चलो

२१२२--२१२२--२१२

आपके किरदार को समझा चलो

नाग की फुफकार को समझा चलो

 

हार कर संसार से हर दौड़ में

वक़्त की रफ़्तार को समझा चलो

 

मोल कुछ पाया नहीं अख़्लाक़ का

ख़ुद ग़रज़ बाज़ार को समझा चलो

 

कहता है कोई शिफ़ा मेरी नहीं

वो मेरे आज़ार को समझा चलो

 

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो

 

दोस्त था लेकिन अदू से जा मिला

मैं भी इक अय्यार को समझा चलो

 

ख़ामोशी इनकार भी इक़रार भी 

वो मेरे इज़हार को समझा चलो

 

आजकल गाता है वो रोता नहीं

दर्द की झंकार को समझा चलो

 

देखकर इक दीप को ‘खुरशीद’ भी

तीरगी के भार को समझा चलो

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 716

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 14, 2015 at 11:43pm

बढ़िया ग़ज़ल हुई है आ० खुर्शीद खैरादी जी 

Comment by umesh katara on January 14, 2015 at 8:04am

उम्दा गजल कही है सर वाह

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 13, 2015 at 2:05pm
उम्दा गजल आदरणीय
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 13, 2015 at 11:14am

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो.........अति उत्तम

आदरणीय भाई खुरशीद जी, पूरी गज़ल के लिये हार्दिक बधाई l

Comment by ajay sharma on January 12, 2015 at 11:02pm

ik sampurna gazal ke liye dhnyawad 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 12, 2015 at 10:02pm
आजकल गाता है वो रोता नहीं
दर्द की झंकार को समझा चलो
वाह ! बधाई आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2015 at 9:16pm

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो

देखकर इक दीप को ‘खुरशीद’ भी

तीरगी के भार को समझा चलो       --------- बहुत बढिया गज़ल हुई है , इन दो अश आर के लिये और गज़ल के लिये बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Shyam Narain Verma on January 12, 2015 at 5:19pm

" बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें । "

Comment by Hari Prakash Dubey on January 12, 2015 at 5:13pm

मोल कुछ पाया नहीं अख़्लाक़ का

ख़ुद ग़रज़ बाज़ार को समझा चलो

कहता है कोई शिफ़ा मेरी नहीं

वो मेरे आज़ार को समझा चलो शानदार ....आदरणीय खुरशीद जी  , पूरी गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाई !

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 12, 2015 at 3:52pm

खुर्शीद भाई

आपके किरदार को समझा चलो

नाग की फुफकार को समझा चलो------ शुरू से ही रंग जमा दिया भाई i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
12 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
13 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
16 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service