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कहीँ तो हो खुदा कोई ~ गज़ल

1222 1222

कहीँ तो हो खुदा कोई ।
सुने दिल की रज़ा कोई ।

झुका है दिल उठे हैँ हाथ ,
करे पूरी दुआ कोई ।

जफा पायी जमाने से ,
निभा जाये वफा कोई ।

किसी से क्योँ खता होती ,
क्यूँ पाता है सजा कोई ।

जो दिल की बेबसी समझे ,
नहीँ ऐसा मिला कोई ।

किसी की याद फिर आयी ,
अश्क बन फिर बहा कोई ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 928

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 7, 2015 at 7:57pm

आदरनीय नीरज भाई , अच्छी गज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

अश्क बन फिर बहा कोई  -- ये मिसरा बेबहर है , अश्क़  की मात्रा 21  होती है , आपने 12 ले लिया है ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 7, 2015 at 12:00pm
आदरणीय नीरज जी आपकी हर गजल दिल को छू जाती है वाह बहुत सुन्दर!
Comment by umesh katara on January 6, 2015 at 10:37pm

अच्छी ग़ज़ल वाहह

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 6, 2015 at 6:45pm

वाह खूब ग़ज़ल हुई है भाई जी

Comment by Hari Prakash Dubey on January 6, 2015 at 5:21pm

  पुनः बधाई आदरणीय नीरज जी, सुन्दर रचना !

Comment by khursheed khairadi on January 6, 2015 at 11:13am

कहीँ तो हो खुदा कोई ।
सुने दिल की सदा कोई ।

आदरणीय नीरज भाई अच्छी ग़ज़ल हुई है | आदरणीय मिथिलेश जी वाला 'गुनिजन ' तो मैं नहीं हूं ,किंतु आपके प्रयास को सादर नमन करते हुये स्नेह सहित अर्ज़ है कि  मतले के अनुसार ख़ुदा-सदा  में  दाल +अलिफ़ का (दा ) काफ़िया(मुतलक़ मौसूल ) है तथा 'कोई' रदीफ़ है | मतले का काफ़िया तथा रदीफ़ ही  सभी शेरों में निभाया जाना चाहिए | अतः आप को या तो मतले में काफ़िया बदलकर ' कहीं तो हो ख़ुदा कोई \सुने दिल का कहा कोई ' कर लेना चाहिए | अथवा आपको ख़ुदा-सदा-जुदा-अदा-रिदा-फ़िदा के काफ़ियों के साथ अशहार की कोशिश करनी चाहिय | भाई जी अन्यथा न ले मैं भी इसी तरह सिखा हूं और सीख रहा हूं .....सीखता रहूँगा |सादर 

Comment by somesh kumar on January 6, 2015 at 10:40am

bhavprd asaar lge ,niyam-vyakrn to mujhe malum nhin,bdhai 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 5, 2015 at 11:56pm
सुन्दर प्रस्तुति , बधाई आदरणीय नीरज जी, सादर।
Comment by दिनेश कुमार on January 5, 2015 at 9:43pm
ग़ज़ल बहुत अच्छी है। मिथिलेश जी की बात सही लगती है।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 5, 2015 at 8:26pm

आदरणीय नीरज भाई जी रचना पर बधाई ...

मतले के अनुसार शायद बाकी अशआर नहीं हुए है ....

बाकि गुनिजन ही बताएँगे 

कृपया ध्यान दे...

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