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अब जाना जफा ज़माने की......................

सजा मिली है मुहब्बत में वफ़ा  निभाने की|
अब जाना जफा ज़माने की.......................
उसने पल भर में उम्मीदों का गला घोंट दिया|
जिंदगी भर न भूलू उसने ऐसी चोट दिया|-२
हसरतें रह गयी पलकों पे उसे सजाने की|
अब जाना जफा ज़माने की......................
उसने इकरार मुहब्बत का बार -बार किया|
मैंने भी बेसुध बेख़ौफ़ उसे प्यार दिया|
यही तमन्ना अब उसको भूल जाने की,
करूँ तमन्ना अब उसको भूल जाने की|
अब जाना जफा ज़माने की......................
अपनी झूठी मुहब्बत में मुझे बांधे रखा|
एक ही तीर से निशाने कई साधे रखा|
ऐसी कोशिश की वो खुद को बहलाने की|
अब जाना जफा ज़माने की......................
सजा मिली है मुहब्बत में वफ़ा  निभाने की|

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Comment

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Comment by आशीष यादव on August 20, 2011 at 9:53am

आप लोगो को मेरी ये रचना पसंद आई मै बहुत प्रसन्न हूँ|
आप लोगो का सुझाव मुझे बहुत अच्छा लगता है| इसे कोई मूढ़ ही अन्यथा लेगा|
आप लोगो को बहुत बहुत धन्यवाद|

Comment by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on August 19, 2011 at 6:48am

मोहब्बत में बेवफाई  एक इम्तिहान है

जोश ए मुहब्बत क्या आसान काम है?

गौर फरमाइए ज़रा हालात पे उनके....

ऐसी  मायूसी का यहाँ कैसा काम है ?  

 

Comment by rohit kumar sahu on April 19, 2011 at 4:34pm

kyo karte ho mohabaat jab wafa ki aas hai,

zuthe hai jamane nkab ki aar par mat azmana kisi ko

Comment by Raju on March 19, 2011 at 8:13pm
bahut badhiya Aashish bhai

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on March 19, 2011 at 6:48pm

क्‍या हो गया भाई, इस उमं में ऐसे झटके लगते रहते हैं और इनसे बचने का एक ही तरीका है कि अनुभवियों की राय मानकर इस छलावे से दूर रहा जाये।

अनुभव की बात यह है कि हम एक ही पक्ष पर विचार करते हैं। दूसरा भी देखें तो बात बने।

Comment by Veerendra Jain on March 18, 2011 at 1:14pm
dard ki sunder abhivyakti ki hai aapne...Aashish ji...bahut badhai..
Comment by GOPAL BAGHEL 'MADHU' on March 17, 2011 at 1:19pm

धीरे धीरे मुहब्बत में आनन्द आने लगेगा 

हर प्यार उसका इकरार लगने लगेगा 

Comment by Rash Bihari Ravi on March 14, 2011 at 7:41pm
bahut badhia khubsurat
Comment by Lata R.Ojha on March 14, 2011 at 12:18pm
"दर्द को गीत बना के सुना दिया ,लोग समझे की नहीं क्या पता बस वाह करते रहे.."
 कुछ ऐसे ही भाव समेटे हुए है ये रचना ..बहुत खूब 
Comment by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 12:35pm
वाह आशीष जी अपनी भावनाओं को शब्दों में कविता के रूप में बखूबी ढाला आपने | रचना प्रभावशाली और प्रशंसनीय है | बधाई |

कृपया ध्यान दे...

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