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मौसम भी नीर बहायेगा ………….

मौसम भी नीर बहायेगा …

भोर होते ही
चिड़ियों का कलरव
इक पीर जगा जाएगा
सांझ होते ही सूनेपन से
हृदय पिघल जाएगा
मुक्त- केशिनी का संबोधन
इक छुअन की याद दिलायेगा
बिना पिया के राह का हर पग
अब बोझिल हो जाएगा
निष्ठुर पवन का वेग भला
कैसे दीप सह पायेगा
रैन बनी अब हमदम तुम बिन
चिरवियोग तड़पायेगा
जाने जीवन के पतझड़ में
मधुमास कब आयेगा
अश्रु बूंदों से तब तक दिल का
स्मृति आँगन गीला हो जाएगा
प्राण प्रिय तुम प्राण मेरे हो
रुष्ट न होना मुझसे तुम
सिसकती साँस की स्वर लहरी से तो
मौसम भी नीर बहायेगा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 15, 2014 at 9:49pm

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ..बधाई आपको .

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 15, 2014 at 8:17pm
मधुमास कब आयेगा
अश्रु बूंदों से तब तक दिल का
स्मृति आँगन गीला हो जाएगा ॥
बहुत सुन्दर लिखा , आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई। सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 15, 2014 at 3:43pm

mausam to baad me bas aapke neer yn hee bahte rahen  sadar I

Comment by Shyam Narain Verma on December 15, 2014 at 2:40pm

" सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ .................. "

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