For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल ~ बज्म ए मुहब्बत मेँ

122 122 122 122

मुहब्बत मेँ अब क्या से क्या बन गया वो ।
किसी की नजर का खुदा बन गया वो ।

कि अब मन्नतोँ मेँ भी है नाम उसका ,
किसी दिल की माँगी दुआ बन गया वो ।

किसी ने तराशी जो तस्वीर उसकी ,
तो इंसान सबसे जुदा बन गया वो ।

उसे देखकर देखकर चैन पाता है कोई ,
किसी दर्दे दिल की दवा बन गया वो ।

कभी बेवफाई के भी था न काबिल ,
मगर अब किसी की वफा बन गया वो ।

लिखी थी खिजाँओँ ने तकदीर जिसकी ,
बहारोँ की महकी फिजा बन गया वो ।

कहीँ दिल की राहोँ मेँ उसका मकाँ है ,
कि अब आशिकी का पता बन गया वो ।

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज मिश्रा

Views: 537

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 16, 2014 at 9:46am

बहुत खूब सूरत गज़ल हुई है , आदरणीय नीरज भाई , दिल से बधाई !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 15, 2014 at 11:58am

नीरज जी

बहुत खूब  i बहुत पसंद आयी गजल i हर शेर सवा शेर है i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 13, 2014 at 7:24pm

बहुत खूब, रचना पर आपको  बधाई

Comment by Shyam Narain Verma on December 13, 2014 at 10:20am

बहुत खूब ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, गजल पर आपको दिल से बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 13, 2014 at 6:56am
कभी बेवफाई के भी था न काबिल
कि अब आशिकी का पता बन गया वो ।
बहुत खूब, आदरणीय नीरज मिश्रा जी, बधाई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 12, 2014 at 10:43pm

किसी ने तराशी जो तस्वीर उसकी ,
तो इंसान सबसे जुदा बन गया वो ।--वाह्ह्ह्ह 

अच्छी ग़ज़ल हुई है और ये शेर तो कमाल का कहा है 

बधाई आपको 

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 12, 2014 at 10:34pm
किसी ने तराशी जो तस्वीर उसकी ,
तो इंसान सबसे जुदा बन गया वो ।बहुत खूब भाई वाह!
Comment by gumnaam pithoragarhi on December 12, 2014 at 6:06pm

वाह अच्छी ग़ज़ल कही है भाई जी


 कहीँ दिल की राहोँ मेँ उसका मकाँ है ,
कि अब आशिकी का पता बन गया वो ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
17 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
18 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service