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गीत ~ उसकी दीवानगी मेँ अब

उसकी दीवानगी मेँ अब मचलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी यादोँ मेँ रह रहकर
युँ जलना छोड दे ऐ दिल ।

जो तेरा हो नहीँ सकता उसे पाने की चाहत क्योँ ।
किसी संगदिल से आखिर तू करे इतनी मुहब्बत क्योँ ।

ये झूठी ख्वाहिशोँ की राह चलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब.............
तमाशे मेँ तेरे पडकर तमाशा हो गया हूँ मै ।
तेरी नादानियोँ से अब परेशाँ हो गया हूँ मै ।

खयालोँ तू उसके अब बहलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब............

झूठी उम्मीद पर अब भी क्योँ अरमानोँ के साये हैँ ।
कि उनका प्यार का उनके सितम भी अब पराये हैँ ।

कि अब गिरता है तो गिर जा सभलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब...........

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज मिश्रा

Views: 848

Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 15, 2014 at 11:48am

नीरज जी

बहुत बेहतर गीत i

Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:24pm
राहुल भाई आपकी प्रतिक्रिया ने तो भाव विभोर कर दिया भाई बहुत खुशी होगी मुझे भी आपके गले लगकर । आपके इस स्नेह हेतु आपका सादर आभार ।
Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:21pm
लक्ष्मण धामी जी आपकी टिप्पणी हेतु आपका बहुत बहुत आभार प्रकट करता हूँ ।
Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:19pm
बहुत सुंदर लफ्जो मेँ अभिव्यक्ति के लिये आपका बहुत बहुत साधुवाद आदरणीय सोमेश जी ।
Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:17pm
मिथिलेश जी बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:16pm
शिज्जू भाई आपका बहुत बहुत आभार प्रकट करता हूँ ।
Comment by Neeraj Nishchal on December 13, 2014 at 6:15pm
बहुत बहुत शुक्रगुज़ार हूँ आपका आदरणीया मीना जी ।
Comment by Rahul Dangi Panchal on December 12, 2014 at 10:46pm
झूठी उम्मीद पर अब भी क्योँ अरमानोँ के साये हैँ ।
कि उनका प्यार का उनके सितम भी अब पराये हैँ ।

कि अब गिरता है तो गिर जा सभलना छोड दे ऐ दिल ।
उसकी दीवानगी मेँ अब...........
दिल जीत लिया भाई वाह! वाह! वाह!
बुरा ना लगे तो गले लग जाओ भाई जान! बधाई हो!
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 12, 2014 at 12:21pm

किसी संगदिल से आखिर तू करे इतनी मुहब्बत क्योँ ।
ये झूठी ख्वाहिशोँ की राह चलना छोड दे ऐ दिल ।

आदरणीय भाई नीरज जी इस बेहतरीन गीत की इन मनभावन पंक्तियों के लिए बधाई ।

Comment by somesh kumar on December 12, 2014 at 7:36am

सभी दोस्त उसे बेवफा समझते हैं

बस एक दिल है की फरेब खाता है 

ये जानता हूँ की खेल रहा है वो मुझसे 

फिर भी जाने क्यों टूटने में मजा आता है |

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