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ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,गुमनाम पिथौरागढ़ी

२१२२     २१२२  

 

 

लाज़ गहना बेचकर आई 

नार जब यारो नगर आई

 

 

ख्वाब में जब तू नज़र आई

कमरे में खुश्बू बिखर आई

 

बेवफा का जिक्र आया गर

आँखे तुझ पर घूमकर आई

 

 

इश्क़ ने जब हाथ थामा तो

हुश्न की सूरत निखर आई

 

 

खत किताबों में पड़ा पाया तो

याद तेरी रहगुजर आई

 

 

जिक्र हो जब भी कभी उसका

यूँ लगे गोया  सहर आई

 

 

ख्वाब आये आँख में बरबस

जब जवानी की उमर आई

 

 

दिल दहल सा उठता है माँ का

सरहदों से जब खबर आई

 

 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on July 18, 2014 at 5:20pm

waah laxman dhami ji  khoob achha laga ,,,,,,,,,,,, sir aapse baat ho sakti hai ,,,,,,,,,,, fon no,........... gar aap chahen...

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 16, 2014 at 11:45am

लाज़ गहना बेचकर आई
नार जब यारो नगर आई.......... क्या कहने गुमनाम भाई
इश्क़ ने जब हाथ थामा तो
हुश्न की सूरत निखर आई...........बहुत खूब  
जिक्र हो जब भी कभी उसका
यूँ लगे गोया  सहर आई..........बहुत ही लाजवाब शेर
ख्वाब आये आँख में बरबस
जब जवानी की उमर आई..........कटु सत्य
दिल दहल सा उठता है माँ का
सरहदों से जब खबर आई  .... एक यादगार  शेर
आ0 गुमनाम भाई इस छोटी बहर की बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 14, 2014 at 9:08pm

आदरणीय गुमनाम भाई , बहुत लाजवाब ग़ज़ल खी है , बधाइयाँ स्वीकार करें ॥

इश्क़ ने जब हाथ थामा तो

हुश्न की सूरत निखर आई

दिल दहल सा उठता है माँ का

सरहदों से जब खबर आई ----- बहुत खूब भाई ॥

खत किताबों में पड़ा पाया तो ------- ये मिसरा बेबह्र हो रहा है ॥

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 14, 2014 at 3:46pm

dhanywaad dosto,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 14, 2014 at 3:04pm

गुम्नाम्  जी

बेहतरीन i  आख़िरी शेर ने तो जान ही निकाल ली i

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 14, 2014 at 9:49am

इश्क़ ने जब हाथ थामा तो

हुश्न की सूरत निखर आई............वाह! बहुत सुंदर, दिली बधाई आपको आदरणीय गुमनाम जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 14, 2014 at 7:52am

आदरणीय गुमनाम जी बहुत बढ़िया बेहतरीन ग़ज़ल है बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 14, 2014 at 2:29am
इश्क़ ने जब हाथ थामा तो
हुश्न की सूरत निखर आई
बहुत अच्छा , बधाई .

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