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लक्ष्यहीन वाल्मिकी

मैं सबसे प्रेम करता था|

मेरे प्रेम को

एक मोबाइल कॉल की तरह अग्रेषित किया

मेरे अपनों ने ही

चमकते सिक्कों की ओर|

मेरे परिवार में मैं मूर्ख कहलाया |

मेरा लक्ष्य प्रेम था,

इसलिए मैं बन गया –

लक्ष्यहीन वाल्मिकी|

** मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 29, 2014 at 10:48am

धन्यवाद् आदरणीय डॉ. प्राची सिंह, जी कहानी चल रही है.... जाने क्यों लम्बी होती जा रही है|


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 28, 2014 at 5:39pm

इस कविता के सन्दर्भ में सार्थक टिप्पणियां हुई हैं 

आपकी कहानी का इंतज़ार रहेगा... 

शुभकामनाएं 

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 20, 2014 at 11:27pm

आप सभी आदरणीयजनों ने जो शुभकामनाये दी हैं, आप सबका हृदय से कोटिशः धन्यवाद| रचना (कहानी) सम्पूर्ण होते ही आप के आशीर्वाद के लिए पोस्ट करूंगा| 

Comment by वेदिका on April 19, 2014 at 11:50pm
रचना का उद्देश्य ग्रहण करने में असमर्थ हुयी हूँ।
रचनाकर्म हेतु हार्दिक बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 18, 2014 at 5:38pm

सुन्दर रचना के लिये आपको बधाई, आदरणीय !!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 18, 2014 at 11:21am

कथा शीघ्र पाठकों तक पहुंचे और प्रशंशा पाये इसी कामना के साथ हार्दिक बधाई , आदरणीय .

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 18, 2014 at 9:06am

एक मार्मिक शुरुआत हुई आदरणीय चंद्रेश जी, आपकी पूर्ण कहानी हेतु बड़ी आतुरता है. शुभकामनायें स्वीकारें

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on April 18, 2014 at 3:04am

आदरणीय coontee जी, आपने सही पहचाना, यह रचना अधूरी ही है| 

एक कहानी लिख रहा हूँ... उसी का शीर्षक है - लक्ष्यहीन वाल्मिकी| उस कहानी का प्रारंभ इस रचना से करने की सोच है| इसका पूरा अर्थ तो कहानी में ही पता चलेगा, अभी लिखना चल ही रहा है|

महर्षि वाल्मिकी को अपने परिवार का त्याग करने के बाद एक लक्ष्य मिल गया था और उन्होंने वाल्मिकी रामायण की रचना कर दी, कहानी में भी ऐसा ही कुछ है... लक्ष्य को तरसता एक व्यक्ति है, जिसके परिवार में व्यक्ति से अधिक धन का महत्व है... वो परिवार का त्याग कर जीवन के लक्ष्य को ढूँढने निकला है.... 

 

आपकी शुभकामनाएं सिर-आँखों पर !!

Comment by coontee mukerji on April 18, 2014 at 1:20am

आपकी रचना में आपकी भावनाओं का स्पष्टिकरण नहीं हुआ है आदरणीय.....रचना अधुरी सी लग रही है.....शुभकामनाएँ.

कृपया ध्यान दे...

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