For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सिखाता रावणों के गुर - ग़ज़ल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

1222    1222    1222    1222

किया माथे तिलक झट से कहा नाकाम भी मुझको
बहुत  ठोका  लुहारों  सा  दिया आराम  भी मुझको

*
गिरा तो भी  समझ मेरी  न आयी  शातिरी उसकी
बिठाया  पास  भी अपने किया बदनाम भी मुझको

*
पता  है  साथ  उसके तो  न आया  था कभी  सूरज
जलाता क्यो न जाने फिर शरद का घाम भी मुझको

*
हसाता  चोट  देकर  भी  बड़ा  जालिम  खुदा  पाया
रूला  देता  न मरने  का सुना  पैगाम  भी  मुझको

*
अजब सी रहमतें  उसकी  अजब ही  सब सजाएं हैं
न रखता भोर  के काबिल न  देता शाम भी मुझको

*
बनाना चाहता  है क्या ‘मुसाफिर ’ मैं न समझा ये
सिखाता  रावणों  के  गुर  पुकारे  राम  भी  मुझको


मौलिक व अप्रकाशित

Views: 666

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by भुवन निस्तेज on March 31, 2014 at 8:32am

kaafi khubsurat andaz-e-bayan hai sahab...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 27, 2014 at 7:51pm

बहुत शान्दार कंट्रास्ट निबाहने की कोशिश हुई है, आदरणीय लक्ष्मण भाई. बधाई स्वीकार करें.

शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 26, 2014 at 9:27pm

बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है... ये शैली बहुत पसंद आयी 

सभी अशआर पसंद आये 

हार्दिक बधाई 

Comment by वीनस केसरी on March 24, 2014 at 1:09am

अशआर में जो कंट्रास्ट पैदा किया गया है लुत्फ़ को कई गुना बढ़ा रहा है ... भी मुझको रदीफ़ अपना कमाल दिखा रही है

हर शेर पर ढेरो दाद

Comment by annapurna bajpai on March 23, 2014 at 12:39am

सुंदर गजल बहुत बधाई आपको । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 22, 2014 at 2:02pm

बहुत बढ़िया लक्ष्मण जी बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 22, 2014 at 8:54am

गिरा तो भी  समझ मेरी  न आयी  शातिरी उसकी
बिठाया  पास  भी अपने किया बदनाम भी मुझको.............. यह शेर दिल को छू गया

हार्दिक बधाई आपको आदरणीय लक्ष्मण जी

Comment by Omprakash Kshatriya on March 22, 2014 at 7:08am

बनाना चाहता है क्या ‘मुसाफिर ’ मैं न समझा ये
सिखाता रावणों के गुर पुकारे राम भी मुझको............... बढ़िया .................. बधाई .

Comment by Sarita Bhatia on March 21, 2014 at 8:41pm

आदरणीय अच्छी गजल के लिए बधाई 

नादिर भाई के कहे का संज्ञान कीजिये 

Comment by नादिर ख़ान on March 20, 2014 at 9:59pm

हसाता  चोट  देकर  भी  बड़ा  जालिम  खुदा  पाया
रूला  देता  न मरने  का सुना  पैगाम  भी  मुझको..........??????

आदरणीय लक्ष्मण जी कुछ अस्पष्ट सा लग रहा है 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
2 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service