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रूठो न दिलदार कि होली आई है- होली गीत-सलीम रज़ा

रूठो न दिलदार कि होली आई है
झूम उठा संसार कि होली आई है
-
साजन हैं परदेस न भाए रंग-अबीर 
गोरी के आँखों से बहता झर-झर नीर
ख़त में साजन को ये लिखकर भेजा है 
तुम बिन नहीं क़रार कि होली आई है
-
होली के दिन बदला हर रुख़सार लगे 
रंग-बिरंगा होली का श्रंगार लगे
पिए भांग हैं मस्त फाग की टोली में 
बरसे रंग-फुहार कि होली आई है
-
होली के दिन बड़ों का आशीर्वाद रहे 
छोटो के संग होली का पल याद रहे
हर मज़हब के लोग खुशी मे खोए हैं 
रंगो का त्यौहार कि होली आई है
_________________________
"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on April 6, 2014 at 9:32pm

आदरणीय सौरभ जी //

जनाब नादिर ख़ान साहब//

आदरणीय  गिरिराज भंडारी //

भाई गजेन्द्र जी आप सब को होली गीत पसंद आया .दिली शुक्रिया // 

आफीसीयाल वयस्तता के कारण आपलोगो से दूर रहा माफी चाहता हूँ //


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 27, 2014 at 4:29pm

भाई सलीमरज़ा, दिल से ले इस होली-गीत के लिए दिलसे धन्यवाद.

विलम्ब से आ पाया हूँ, इसका मझे मलाल है, खेद व्यक्त करता हूँ.

शुभ-शुभ

Comment by Gajendra shrotriya on March 19, 2014 at 10:24pm

 बहुत खूब  आदरणीय सलीम रजा साहब , आपकी  कलम रूपी पिचकारी से छूटे शब्द रूपी रंगों ने होली के सम्पूर्ण माहौल को बयां  कर दिया है । बहुत बधाई इस शानदार होली गीत के लिए । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2014 at 5:55pm

आ. सलीम भाई , बहुत सुन्दर भाव पूर्ण गीत रचना के लिये आपको बधाइयाँ ॥

Comment by नादिर ख़ान on March 17, 2014 at 7:44pm
साज़न हैं परदेस न भाए रंग अबीर 
दिल रोए और आँखों से बहता है नीर
उनको दिल का हाल ये लिखकर भेजा है 

तुम बिन नहीं करार कि होली आई है 

सुंदर गीत के लिए आदरणीय सलीम भाई मुबारकबाद ....

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