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उलझे प्रश्नों में हँसता मन

क्यूँ
हाँ क्यूँ
मेरा मन
मेरा कहा नहीं मानता
क्यूँ मेरा तन
मेरे बस में नहीं
न जाने इस पंथ का अंत क्या हो
किस इच्छा के वशीभूत हो
मेरे पाँव
अनजान उजाले की ओर आकर्षित हो
निरंतर धुल धूसरित राह पे
बढ़ते ही जा रहे हैं
ये तन
उस मन के वशीभूत है
जो स्थूल रूप में है ही नहीं
न जाने मैं इस राह पे
क्या ढूढने निकला हूँ
क्या वो
जो मैं पीछे छोड़ आया
या वो
जो मेरे मन की
गहरी कंदराओं में
छुपा बैठा है
मन के
राग-विराग, सुख-दुःख
मिलन-विरह, जीवन-मरण के प्रश्न
आज भी उत्तर की प्रतीक्षा में
मानव की बेबसी का उपहास उड़ा रहे हैं
बेलगाम घोड़े सा ये मन
अपनी इच्छा रूपी
नागफ़ास की कुंडली में
तन को उस उजाले की ओर ले जा रहा है
जो स्वयं अन्धकार के वश में है
क्या इस मन और जीवन रूपी राह का अंत निर्वाण है
शायद हाँ
शायद न
तन हारा न हारा मन
लम्बी राहें थकता जीवन
जन्म-मरण और पुनर्जन्म
उलझे प्रश्नों में हँसता मन, उलझे प्रश्नों में हँसता मन ……

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 880

Comment

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Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 1, 2014 at 7:21pm

आ. सुशील भाई नव वर्ष की शुभ कामनाओं के साथ आपको इस सुंदर दार्शनिक भाव लिए रचना की भी हार्दिक बधाई॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 1, 2014 at 5:21pm

इन्द्रियों को आकर्षित करने वाले मोह बंद मन को बाहर खींचते हैं और क्षणिक उजास के भ्रम में मन उस और कदम बढ़ा देता है जो वस्तुतः राग द्वेष, सुख-दुःख, विरह मिलन के दो छोरों के बीच दोलन ही करता रह जाता है. संकेंद्रित जितेन्द्रिय मन जब अंतर्गामी होता है तब ही जन्म-मरण की गुत्थी को सुलझा कई कई और प्रश्नो के उत्तर पाता है और निर्वाण के अर्थ का भान पाता है.... इस मन को नियंत्रण में करना ही योग साधना का मूल होता है 

बहुत खूबसूरत चिंतन को शब्द देती सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हृदय तल से बधाई आ० सुशील सरना जी 

Comment by Sushil Sarna on January 1, 2014 at 3:35pm

aa.Vijay Nikore jee rachna pr aapkee snehaasheesh ka haardik aabhaar

Comment by vijay nikore on January 1, 2014 at 10:20am

अति सुन्दर भाव। बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sushil Sarna on December 31, 2013 at 6:12pm

haardik aabhaar aa.Giriraj Bhandaaree jee aapkee is aatmeey abhivyakti ka


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 30, 2013 at 8:18pm

आदरणीय सुशील भाई , बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति , सुन्दर रचना के लिये आपको बधाई ॥

Comment by Sushil Sarna on December 30, 2013 at 1:06pm

aadrneeya Coontee Mukerji jee rachna par aapkee snehil prashansa ka haardik aabhaar

Comment by coontee mukerji on December 29, 2013 at 10:45pm


तन हारा न हारा मन
लम्बी राहें थकता जीवन
जन्म-मरण और पुनर्जन्म
उलझे प्रश्नों में हँसता मन.....अति सुंदर.

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2013 at 2:05pm

aa.Jitender Geet jee rachna par aapke in snehyukt udgaaron ka tahe dil se shukriya

Comment by Sushil Sarna on December 28, 2013 at 2:04pm

aa.Shijju Shakur jee rachna par aapkee madhur prshansa ka haardik aabhaar

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