For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - आप नाटक में नया किरदार लेकर आ गये !!

पीड़ितों के बीच से तलवार लेकर आ गये 

आप नाटक में नया किरदार लेकर आ गये |

मैं समझता था हर इक शै है बहुत सस्ती यहाँ

एक दिन बाबा मुझे बाज़ार लेकर आ गये |

माँ के हाथों की बनी स्वेटर थमाई हाथ में

आप बच्चे के लिए संसार लेकर आ गये |

क़त्ल, चोरी, घूसखोरी, खुदखुशी बस, और क्या

फिर वही मनहूस सा अख़बार लेकर आ गये |

दोस्तों से अब नहीं होती हैं बातें राज़ की
चन्द लम्हे बीच में दीवार लेकर आ गये |

-- शीष नैथानी 'लिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

[ मात्रिक विन्यास - 2122 2122 2122 212 ]

Views: 833

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 4, 2014 at 5:47pm

आदरणीय भाई वीनस जी,
आदरणीया कुंती जी,
आदरणीय गिरिराज जी,
आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी... हौसलाअफजाई के लिए शुक्रगुजार हूँ आप सभी का !!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 4, 2014 at 5:45pm

आदरणीय भाई राम शिरोमणि जी,
आदरणीय नादिर ख़ान जी,
आदरणीय भाई शिज्जु जी... आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 30, 2013 at 10:45pm

दोस्तों से अब नहीं होती हैं बातें राज़ की 
चन्द लम्हे बीच में दीवार लेकर आ गये |..............वाह वाह 

सीधे दिल में घर कर जाने वाला शेर हुआ है आ० आशीष जी 

बहुत बहुत बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 27, 2013 at 10:50pm

एक-एक शेर सवा लाख का.. इससे आगे कुछ नहीं आशीष भाई.. 

मुग्ध कर दिया आपने.

दाद दाद दाद...............

Comment by SHIVA RATAN DEWRA on December 27, 2013 at 7:37pm

बहुत सुन्दर .....

Comment by MAHIMA SHREE on December 27, 2013 at 7:28pm

वाह वाह आशीष जी ..बहुत ही शानदार ... लाजवाब गजल कही है .. बेहद गहन अभिव्यक्ति हुयी है .. हर शेर एक से बढ़कर एक है ....हार्दिक बधाई आपको

Comment by Shyam Narain Verma on December 27, 2013 at 5:03pm
सुन्दर गज़ल हेतु बधाई.............
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 27, 2013 at 2:56pm

सलिल जी

आपको बहुत बहुत बधाई i  अच्छी ग़ज़ल के लिए i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:59am

आदरणीय आशीष भाई , क्या शान दार गज़ल कही है , वाह !! बहुत खूब ॥ हर शे र सुन्दर लगे , बहुत बधाई ॥

Comment by coontee mukerji on December 27, 2013 at 2:42am

दोस्तों से अब नहीं होती हैं बातें राज़ की
चन्द लम्हे बीच में दीवार लेकर आ गये |......बहुत खूब.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
4 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service