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देवदार के पत्ते पर 

बर्फ के कतरे जितनी
मेरी अभिलाषा |

उस पर भी दुनिया की सौ-सौ शर्तें
सौ-सौ पहरे
तीक्ष्ण-तल्ख भाषा |

पलकों की ड्योढ़ी पर बैठे स्वप्न
कुछ नेपथ्य में टूट-फूट
करते विलाप
सभी प्रतीक्षारत, कब छँटे
घना कुहासा |

प्रस्वेदित तन
म्लानता का प्रचण्ड सूरज
जीवन नभ पर
और सिद्धि की
शून्य सदृश आशा |

भिक्षुक द्वार खड़ा आशीष लिए
दानी परदे में बैठा
यहाँ कौन भिक्षुक ?
प्रभु !
कैसी परिभाषा |

मेरी अभिलाषा...

- आशीष नैथानी सलिल
(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 7, 2014 at 10:50pm

आदरणीय सौरभ जी, मैने आपकी टिप्पणी के लिये लम्बा इंतजार किया :)))  कई बार सोचा आपको कविता का लिंक देकर एक बार राय पूछ लूँ (अवलोकनार्थ) लेकिन फिर स्वप्रचारित करना अच्छा नहीं लगा, सोचा कभी न कभी रचना आपकी नजरों से गुजर ही जायेगी | आज वही हुआ, कविता पर आपकी अमूल्य टिप्पणी पाकर अभिभूत हुआ | 

बहुत-बहुत धन्यवाद | :)
Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 7, 2014 at 10:39pm

कविता पर अपनी अमूल्य टिप्पणियों के लिये आदरणीया मीना जी, आदरणीय श्याम नारायण जी, आदरणीया अनुपमा जी, आदरणीय जितेन्द्र जी, आदरणीय आशुतोष जी, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया !!!  :)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 4, 2014 at 3:53pm

मेरी बार बार बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ लीजिये भाई आशीषजी.
बहुत सार्थक संयत और सुगढ़ रचना प्रस्तुत की है आपने.
शुभेच्छाएँ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 15, 2014 at 10:14am

भिक्षुक द्वार खड़ा आशीष लिए 
दानी परदे में बैठा
यहाँ कौन भिक्षुक ?
प्रभु !
कैसी परिभाषा |  आदरणीय आशीष जी सच में कौन भिक्षुक है यह कह पाना मुश्किल है ..शानदार राचन के लिए मेरिट तरफ से तहे दिल बधाई सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 15, 2014 at 8:27am

सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति, बधाई स्वीकारें आदरणीय आशीष जी

Comment by annapurna bajpai on February 13, 2014 at 7:33pm

सुंदर भावभिव्यक्ति , बधाई आपको । 

Comment by Shyam Narain Verma on February 13, 2014 at 4:48pm
बहुत सुन्दर, बहुत भावपूर्ण।
Comment by Meena Pathak on February 13, 2014 at 2:54pm

बहुत सुन्दर अभिलाषा 

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