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तमाम रात गुजरने के बाद आते हैं

वो अपने यार को छलने के बाद आते हैं

दिलों में दर्द उभरने के बाद आते हैं

 

चमकते चाँद सितारे गगन में लगता है  

विरह की आग में जलने के बाद आते हैं

 

न कोई देख ले चेहरे की झुर्रियां यारों  

तभी वो खूब सँवरने के बाद आते हैं

 

हमारे दर्द भी करते हैं नौकरी शायद

हमेशा शाम के ढलने के बाद आते हैं

 

तुम्हारी याद के जुगनू भी बेबफा तुम से

तमाम रात गुजरने के बाद आते हैं ..............दीप...............

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 26, 2013 at 6:46pm
चमकते चाँद सितारे गगन में लगता है
विरह की आग में जलने के बाद आते हैं..बहुत सुन्दर

हार्दिक बधाई इस सुन्दर ग़ज़ल पर
Comment by राजेश 'मृदु' on November 25, 2013 at 2:31pm

जय हो आदरणीय, बढि़या प्रस्‍तुति है, इधर कुछ अरसे से देख रहा हूं कि आपकी लेखनी में कुछ चटकीले रंग घुल गए हैं जो उपर-उपर तैरते हुए से लग रहे हैं, कुछ गहरे रंग भी पेश करें गुजारिश है ताकि आप्राण अनुप्राणित हो रोम-रोम से जय हो कर सकें, सादर

Comment by Shyam Narain Verma on November 25, 2013 at 1:12pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on November 25, 2013 at 8:23am

बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है संदीप जी। हर एक शेर लाजवाब। और ये शेर तो बहुत अच्छा हो गया है:

चमकते चाँद सितारे गगन में लगता है  

विरह की आग में जलने के बाद आते हैं

ढेरों दाद कुबूल हो 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 24, 2013 at 12:34pm

वाह वाह वाह और वाह ...क्या मतला क्या शेर .. क्या ग़ज़ल ... आहा ... ऐसी ग़ज़ल पढना ..बहुत बहुत  बधाई. बहुत बड़ी ग़ज़ल है ये ..संदीप भाई ..सहेजियेगा... आप की ज़िम्मेदारी बढ़ गई है इस ग़ज़ल के बाद क्यूँ की हमारी उम्मीदें बढ़ गई है आप से.   

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 23, 2013 at 8:00pm

लाजबाब गजल के लिये ढेरों बधाइयाँ

Comment by विजय मिश्र on November 23, 2013 at 5:48pm
इस सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई संदीपजी , सुंदर शब्दों को पिरोये हैं .
Comment by Abhinav Arun on November 23, 2013 at 5:04pm

लाजवाब शानदार ख़ूबसूरत कलाम ! बधाई संदीप जी !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 23, 2013 at 4:14pm

आदरणीय संदीप भाई जी बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल दो शेर तो कमाल के बन पड़े हैं इनके लिए विशेष दाद कुबूल फरमाएं.

न कोई देख ले चेहरे की झुर्रियां यारों  

तभी वो खूब सँवरने के बाद आते हैं.. बेहतरीन

 

हमारे दर्द भी करते हैं नौकरी शायद

हमेशा शाम के ढलने के बाद आते हैं .. बेहद उम्दा वाह वाह


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 22, 2013 at 11:50pm

हमारे दर्द भी करते हैं नौकरी शायद

हमेशा शाम के ढलने के बाद आते हैं-----वाह्ह्ह शानदार शेर संदीप जी दाद कबूलें 

 

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