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फिर बारिशें होने लगती हैं......

फिर बारिशें होने लगती हैं......

कभी कभी
एक दावानल सा भड़क जाता है
मन के
हरे भरे /महकते
चहचहाते /किलोल करते
गर्जनाओं और वर्जनाओं के / जंगल में
डर
चीखों और चीत्कारों के साथ
हावी हो जाता है....
बेचैनी / घबराहट / घुटन / यंत्रणा
जैसे शब्द
किसी क्षण की चरम स्थितियों का
ब्रह्माण्ड रच पाते होंगे
मुझे संदेह है / पर अब
संदेह / इस बात में नहीं कि
जीजिविषा की छटपटाहट / और
पूरी एकाग्रता से
क्षणांश का /अंतिम प्रयास
जीवन को खींच लाता है
हर बार
फिर निरंतरता की ओर
फिर बारिशें होने लगती हैं
भीग जाता है मन
फिर हरा भरा हो जाता है
मन का जंगल..
मैं जानता हूँ / डर छाया की तरह /
मेरे साथ चलता रहेगा / दोपहर से शाम तक
मुझे परवाह नही
क्योंकि मेरे साथ होंगे
संघर्ष में जीत के अनेक अनुभव
तेरी असीम कृपा और
सार्थकता के क्षण ....

 -ललित मोहन पन्त

"मौलिक व अप्रकाशित"

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 18, 2013 at 2:19pm

मैं जानता हूँ / डर छाया की तरह /
मेरे साथ चलता रहेगा / दोपहर से शाम तक
मुझे परवाह नही
क्योंकि मेरे साथ होंगे
संघर्ष में जीत के अनेक अनुभव................सकारात्मक अंत 

सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 16, 2013 at 8:26pm

अरेवाह ! सकारात्मक नोट पर कविता का सम्पन्न होना उत्साहित कर गया.

कविता में पंक्ति-परिवर्तन तथा प्रयुक्त चिह्नों के प्रयोग का आधार कुछ स्पष्ट नहीं हुआ. कृपया साझा कीजियेगा.

सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 16, 2013 at 12:38pm

बेहतरीन रचना ..आदरणीय डॉ ललित जी इस सुंदर भावमयी रचना हेतु तहे दिल बधाई 

Comment by dr lalit mohan pant on November 16, 2013 at 12:42am

आ ० Baidya Nath 'सारथी'  जी डॉ. अनुराग सैनी जी Shijju ShakoorAbhinav जी ArunMeena Pathak जी  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी  आप सभी का हृदय  से आभार  . मन प्रफुल्लित हुआ आपकी सराहना पाकर  .... सदैव ऐसे स्नेह बनाये रखें  . 

Comment by Saarthi Baidyanath on November 15, 2013 at 10:24pm

क्या बात ....भावनात्मक है !....

एक दावानल सा भड़क जाता है
मन के
हरे भरे /महकते
चहचहाते /किलोल करते
गर्जनाओं और वर्जनाओं के / जंगल में.....बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति , शब्दों की अच्छी गुंथन..:)

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on November 15, 2013 at 10:16pm

सुन्दर और सार्थक कविता 

अपने अर्थ को बयां करने में सक्षम 

बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:15am

बहुत अच्छी कविता आदरणीय डॉ ललित मोहन पंत जी बधाई स्वीकार करें

Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 9:12pm

सुंदर भावाभिव्यक्ति है आ0 पंत जी...... हार्दिक बधाई....

Comment by Abhinav Arun on November 14, 2013 at 7:27pm

सशक्त रचना डॉ ललित जी हार्दिक बधाई !

Comment by Meena Pathak on November 14, 2013 at 12:06pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति | बधाई स्वीकारें | सादर 

कृपया ध्यान दे...

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