For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं



1 2 2 2    1 2 2 2    1 2 2 2    1 2 2 2

हुए रुखसत दिले -नादां  की ही  कुछ सिसकियाँ भी थी
खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं

लहर तडपी थी हर इक याद पे मचला भी था साहिल
ज़माने की वही रंजिश में डूबी किश्तियाँ  भी थीं

बिखरती वो घड़ी बीती न जाने कितनी मुश्किल से
दबी ही थी जो सीने में क़सक की बिजलियाँ भी थीं

कभी कहते थे वो भी उम्र भर यूँ साथ चलने को
चलीं हैं साथ जो अब तक वही गमगीनियाँ भी थीं

भुलाकर यूँ न जी पायेंगे गुजरे वक़्त को हमदम
नहीं भूले हैं जो अब तक, वही बेचैनियाँ भी थीं

अभी तक  याद है वो  कौन सा लम्हा हुआ कातिल
नज़र खामोश थी  औ दिल की कुछ  मजबूरियाँ भी थीं

संजू शब्दिता मौलिक व अप्रकाशित ji

Views: 1064

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by annapurna bajpai on October 3, 2013 at 9:20pm

आदरणीया संजु जी बहुत ही सुंदर गजल रचना के लिए बधाई आपको । 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 3, 2013 at 5:36pm

आदरणीया संजू जी ..एक बिरहनी की व्यथा को उजागर करती इस शानदार ग़ज़ल का ये शेर मुझे बेहद भाया ..अभी तक  याद है वो  कौन सा लम्हा हुआ कातिल
नज़र खामोश थी  औ दिल की कुछ  मजबूरियाँ भी थीं,,,,आपको हार्दिक बधाई के साथ 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 3, 2013 at 5:29pm

अति सुन्दर ! इस सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई !

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 3, 2013 at 4:48pm

आदरणीया संजू जी बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने प्रेम विरह से ह्रदय में उत्पन्न भावों को सुन्दरता से पिरोया है आपने. मुझे भी थीं का प्रयोग खटक रहा है, भी थीं की जगह ही हैं करके पढ़ने में अधिक उचित लग रहा है ऐसा मेरा मानना है. बहरहाल प्रयास अच्छा हुआ है इस हेतु बधाई स्वीकारें.

Comment by coontee mukerji on October 3, 2013 at 1:15pm

कभी कहते थे वो भी उम्र भर यूँ साथ चलने को
चलीं हैं साथ जो अब तक वही गमगीनियाँ भी थीं................बहुत सुंदर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 3, 2013 at 9:34am

संजू जी सुन्दर ग़ज़ल लिखी है कही कही सुधर की गुंजाइश है 

शिज्जू जी की बात से सहमत हूँ 

कस्तियाँ या किश्तियाँ ?

ज़माने की वहाँ कर लें अन्यथा वही के साथ किश्तियाँ उचित नहीं 

दबी ही थी जो सीने में------मेरे मन में दबी थी जो कसक की बिजलियाँ भी थी ---करके देखें बहर सही आएगी 

नज़र खामोश थे औ दिल की कुछ मजबूरियाँ भी थीं ----नज़र खामोश थी फिर दिल की कुछ मजबूरियाँ भी थी ---कर के देखिये 

नजर खामोश थे ठीक नहीं 

बहरहाल इस ग़ज़ल के लिए बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 3, 2013 at 8:54am

हुए रुखसत दिले -नादान की कुछ सिसकियाँ भी थी
खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं

वाह!!! बहुत खूब गज़ल है. आदरणीया बहुत-बहुत बधाई...........


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 3, 2013 at 8:16am

//हुए रुखसत दिले -नादान की कुछ सिसकियाँ भी थी
खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं//


"दिले -नादान"  यहाँ आपने हर्फे इजाफत का प्रयोग किया है इसलिये दिले-नादां होगा न कि दिले-नादान

ग़ज़ल के भाव अच्छे हैं बधाई स्वीकार करें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 3, 2013 at 7:55am

आदरणीया संजू जी , बहुत अच्छी गजल कही है आपने , बधाई !!!!

Comment by vandana on October 3, 2013 at 7:25am

वाह आदरणीया संजू जी बहुत बढ़िया 

भुलाकर यूँ न जी पायेंगे गुजरे वक़्त को हमदम 
नहीं भूले हैं जो अब तक, वही बेचैनियाँ भी थीं 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service