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बेशर्म लोगों की

बड़ी -बड़ी फ़ौज है

चोर हैं उचक्के हैं

लूट रहे मौज हैं

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थाने अदालत में

'चोर' बड़े दिखते  हैं

नेता के पैरों में

'बड़े' लोग गिरते हैं

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बूढा किसान साल-

बीस ! आ रगड़ता है

परसों तारीख पड़ी

कहते 'वो' मरता है

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बाप की पगड़ी में

'भीख' मांग फिरता है

'नीच' आज नीचे 'पी'

गिरता फिसलता है

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गधे और उल्लू का

बड़ा बोलबाला है

भक्त 'बड़े' चमचे हैं

जिनका मुंह काला है

-------------------------

नीति -रीति नियम -प्रीति

रोती हैं खोती हैं

विद्या व् लक्ष्मी भी

महलों जा रोती  हैं

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सूरज भी क्षीण हुआ

अँधियारा छाया है

राहु-केतु ग्रहण लगा

कौन बच पाया है ?

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५

1.30 P.M.-2.08 P.M.

कुल्लू हिमाचल

26.08.2013

Views: 879

Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 18, 2013 at 7:33pm

प्रिय शिरोमणि जी आभार प्रोत्साहन हेतु ..रचते रहिये आप सब ..आज के युवा जब इसमें रूचि लेते हैं तो अति आनंद आता है शुभ कामनाएं

आभार
भ्रमर ५

Comment by ram shiromani pathak on September 18, 2013 at 7:26pm
  • आदरणीय सुरेन्द्र कुमार जी ,बहुत सुन्दर वर्णन किया है आपने//बहुत बहुत बधाई
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 18, 2013 at 7:05pm

आदरणीय विजय निकोर जी जय श्री राधे ....रचना वास्तविकता को दर्शाती हुयी आप के मन को छू सकी सुन ख़ुशी हुयी अपना स्नेह बनाये रखें
आभार
भ्रमर ५

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 18, 2013 at 7:04pm

आदरणीया विजयश्री जी रचना आज के परिदृश्य में कुछ सच्चाई उजागर कर सकी लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर ५

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 18, 2013 at 7:03pm

प्रिय अनंत जी रचना की हर पंक्ति बंद को आप से सरहना और मान मिला ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 18, 2013 at 7:02pm

प्रिय गीत जी रचना कुछ वास्तविकता के दर्द को उजागर कर सकी लिखना सार्थक रहा आप ने सराहा
आभार
भ्रमर ५

Comment by vijay nikore on September 18, 2013 at 1:12pm

वास्तविक्ता को दर्शाती रचना रोचक लगी।

बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by vijayashree on September 18, 2013 at 12:38pm

 

सत्यता को उजागर करती इस रचना पर बधाई स्वीकारें सुरेन्द्र कुमार जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 18, 2013 at 11:46am

आदरणीय वर्तमान परिस्थति का सुन्दरता से वर्णन किया है आपने प्रत्येक पंक्ति शानदार है आदरणीय ढेरों बधाई स्वीकारें.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 17, 2013 at 12:07am

गधे और उल्लू का

बड़ा बोलबाला है

भक्त 'बड़े' चमचे हैं

जिनका मुंह काला है.........वाह! वास्तविकता का आइना दिखाती पंक्तिया

बहुत बहुत बधाई आदरणीय सुरेन्द्र जी

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