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लगे जताने बहुत बड़े है

121    22   121    22

.

जहाँ जरूरी हुआ अड़े हैं,

इसीलिए हम यहाँ खड़े हैं

 

जिन्हें जरूरत जहान भर की

वहीँ मशाइल  बड़े-बड़े हैं

 

समय उन्हीं के लिए बना है

जिन्हें कि हर पल लगे बड़े हैं

 

मिली जरा सी उन्हें जो शुहरत,

लगे जताने बहुत  बड़े है

 

जिन्हें नाकारा  है तेरी दुनिया   

हम उनके हक़ में सदा लड़े हैं

 

किसी की कमियों से क्या है लेना

अगर है खूबी, वहीँ अड़े हैं

 

 

मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment by वीनस केसरी on July 27, 2013 at 1:10am

जहाँ जरूरी हुआ अड़े हैं,

इसीलिए हम यहाँ खड़े हैं



मिली जरा सी उन्हें जो शुहरत,

लगे जताने बहुत  बड़े है

वाह वा डॉ साहब मज़ा आ गया ...

पोस्ट पर देर से आ सका इसके लिए अफ़सोस है

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on July 19, 2013 at 7:00pm

इसे जिन्हें नकारे तुम्हारी दुनिया  

आपकी सलाह बेहतर है , सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 18, 2013 at 8:55pm

आदरणीय ललितजी, आपकी इस प्रस्तुति के लिए साधुवाद.  काफ़िया तंग है यह तो साफ़ दिख रहा है. फिर भी कुछ और काफ़ियों का प्रयोग ग़ज़ल को बेहतर कहन देता. 

जिन्हें नाकारा  है तेरी दुनिया  .. में नाकारा कुछ जमा नहीं,आदरणीय.  इसे जिन्हें नकारे तुम्हारी दुनिया  कर बेहतर प्रभाव लाया जा सकता है.   ऐसा मझे लगा.  कुछ और बेहतर मिसरे हो सकते हैं.

समय उन्हीं के लिए बना है

जिन्हें कि हर पल लगे बड़े हैं

 

मिली जरा सी उन्हें जो शुहरत,

लगे जताने बहुत  बड़े है

इन अशार के लिए बहुत-बहुत दाद कह रहा हूँ. 

Comment by विजय मिश्र on July 16, 2013 at 5:53pm
"समय उन्हीं के लिए बना है,जिन्हें कि हर पल लगे बड़े हैं"

-कम शब्दों में हीं सफलता का सन्देश दिया आपने ,यह जीवन परिचय हो शेष कुछ हो न हो . आभार ललितजी .
Comment by Shyam Narain Verma on July 16, 2013 at 1:09pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..
Comment by vandana on July 16, 2013 at 7:03am

जिन्हें जरूरत जहान भर की

वहीँ मशाइल  बड़े-बड़े हैं

bahut badhiya 

Comment by ajay sharma on July 15, 2013 at 10:37pm

जिन्हें जरूरत जहान भर की

वहीँ मशाइल  बड़े-बड़े हैं            ,,,,,,,bahut satik

sare ke sare sher shandaar hain

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