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चीखती हैं सरहदें

चीखती हैं सरहदें और जागते जवान हैं|

रक्त से शहीदों के अब लाल आसमान है||

शहीद होते पूतों की माताएँ सिसक रही|

बिछुड़ के अपने पति से पत्नियाँ बिलख रही||

 

पित्रहीन बच्चों का भी चेहरा रंगहीन है|

परिवार था खुश कभी आज दीनहीन है||

 

मुआवजे की भीख दे नेता जी उबर लिए|

चेतावनी जो बदले की उससे वो मुकर लिए||

 

सो रहे नेताओं से मेरा एक सवाल है|

जो काटे सिर हेमराज का किसलिए मेहमान है||

 

सर के बदले सर ही अब तुम भी क्यों न मांगते|

बनते खैरख्वाह जो दायित्व से क्यों भागते||

 

नापाक रूपी पाक से तुम मित्रता क्यों चाहते|

जो सांप आस्तीन का उसे दूध तुम क्यों बांटते||

 

साथ पूरा देश है हिम्मत जरा दिखाइए|

तुम राजनीति छोड़ अब देश को बचाइए||

 

अब क्रोध है जवानों में कि सीना चीर डालेंगे|

उठी जो आँख देश पे वो आँख फोड़ डालेंगे||

 

भगत, आज़ाद, बोस जिस देश की पहचान हैं|

उसकी अस्मिता को अपनी जान भी कुर्बान है||

                                 हरीश उप्रेती "करन"

                               मौलिक व् अप्रकाशित

 

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Comment by Harish Upreti "Karan" on June 30, 2013 at 12:45pm

आदरणीय लक्ष्मण सर धन्यवाद्......

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 30, 2013 at 12:42pm

जवानों में जोश भर्ती रचना के लिए बधाई श्री हरीश उत्प्रेती जी -

शहीदों पर न हो राजनीति,उत्प्रेरित करती रचना 

होंसला बढे वीर जवान का,बस इतना ही कहना | 

Comment by Harish Upreti "Karan" on June 30, 2013 at 11:32am

आदरणीय जीतेन्द्र जी होंसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया...

Comment by Harish Upreti "Karan" on June 30, 2013 at 11:27am

रविकर सर बहुत बहुत शुक्रिया...

Comment by Harish Upreti "Karan" on June 30, 2013 at 11:25am

आदरणीय जवाहर लाल जी होंसला अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्......जय हिन्द

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 30, 2013 at 7:04am

साथ पूरा देश है हिम्मत जरा दिखाइए|

राजनीति छोड़ अब देश को बचाइए|| .... ये जज्बा कब आयेगा? सुंदर आह्वान! 

Comment by Shyam Narain Verma on June 29, 2013 at 4:50pm

बहुत ही सुंदर व मर्मस्पर्शी रचना..................

Comment by Sumit Naithani on June 28, 2013 at 4:00pm

साथ पूरा देश है हिम्मत जरा दिखाइए|

तुम राजनीति छोड़ अब देश को बचाइए|| सार्थक 

Comment by रविकर on June 28, 2013 at 10:19am

कारुणीक
आभार आदरणीय-
एक प्रतिक्रिया-

कीमत मत मानव लगा, महा-मतलबी दृष्टि |
हिम्मत से टकरा रहे, भरी चुनौती सृष्टि |
भरी चुनौती सृष्टि, वृष्टि कुहराम मचाये |
अहंकार हो नष्ट, तिगनिया नाच नचाये |
जय जय जय हे वीर, भगाते आई शामत |
सादर तुम्हें प्रणाम, चुकाई भारी कीमत ||

Comment by Harish Upreti "Karan" on June 27, 2013 at 10:53pm

आदरणीय प्राची जी बताने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया......

कृपया ध्यान दे...

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