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ये काग़ज़ पे लिखी तरक्कियां, कुछ और कहती हैं
मगर लाखों करोड़ों झुग्गियां, कुछ और कहती हैं !

बड़ा फराख दिल है शहर तेरा शक नहीं मुझ को ,
ये हर-सू बंद पड़ी खिड़कियाँ, कुछ और कहती हैं !

तेरा दा'वा है कि अमन-ओ-सकूं है शहर में सारे,
मगर अख़बार की ये सुर्खियाँ, कुछ और कहती हैं !

मुझे यकीं नहीं आता बहार आ गयी, क्यों कि
उदास चेहरे लिए तितलियाँ, कुछ और कहती हैं !

मुझे गुमान था कि मैं बना हूँ खुद के ही दम से,
मेरे बापू की बूढी हड्डियाँ, कुछ और कहती हैं !

मैं फूलों तितलितों के दरमियाँ बसना तो चाहूं, पर
मेरे कुनबे की जिम्मेवारियां, कुछ और कहती हैं !

हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 17, 2017 at 11:39pm

एक और बेहतरीन कलाम आपका आदरणीय सर | हर शेर पर वाह वाह और वाह |

Comment by Naval Kishor Soni on August 28, 2012 at 1:05pm

हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं--------------bahut khub

Comment by Aparna Bhatnagar on September 18, 2010 at 11:54pm
कलम उगलेगी आग अब यकीनन,
जख्म दिल का पुराना मिल गया है !
हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं

behad samvedansheel!
Comment by दुष्यंत सेवक on May 20, 2010 at 2:25pm
aaina dikha diya apne hindustan ka.....kya andaje baya kya bimb kya behtareen shabdo ka sanyyojan ....bahut hi umda aur ala rachna sir
Comment by asha pandey ojha on May 16, 2010 at 1:55pm
तेरा दा'वा है कि अमन-ओ-सकूं है शहर में सारे,
मगर अख़बार की ये सुर्खियाँ, कुछ और कहती हैं !

मुझे यकीं नहीं आता बहार आ गयी, क्यों कि
उदास चेहरे लिए तितलियाँ, कुछ और कहती हैं !
sir samjh me nahee aata ki aap kee gzal kee tareef me lafz khan se laun ..kyonki wo ..aap kee gzal padhne me gum ho gaye ..bahut khoob ..,lazwab ..

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 15, 2010 at 1:30pm
Apki mohabbat hai bhai jaan. Baraye meharbaani hamesha sath rahein hamare.
Comment by fauzan on May 15, 2010 at 1:13pm
Yograj Bhai
saaf seedhi aur sacchi soch hai aapki...Waah

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 11, 2010 at 10:31am
Bhai Biresh Kumar ji, Preetam Tiwari ji, Ravi Kumar Giri (Guru ji), ADMN ji, Ganesh Bagi ji - ap sab doston ki hausla afzayti ka bahut bahut shukriya.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 11, 2010 at 10:03am
Sarey key sarey shaer behtarin aur arth sey paripurna hai, jabardast abhvyakti hai Yograj bhaiya, baut umdda gazal likhey hai aap ney, bahut hi sunder,
Comment by Rash Bihari Ravi on May 10, 2010 at 3:15pm
हरेक नारी नदी को माँ बुलाना संस्कृति जिनकी
वहां जिस्मों की लाखों मंडिया, कुछ और कहती हैं

aap ki gajal ka murid huin main ,
karan gajal padh kar dil se comment karte hain

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