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(1)तपता तन
सूरज की किरणें
लाचार जन

(2)धूप का घर
तरुवर की छाया
ठंडी बयार

(3)सभी बेकल
अनुभव करते
उष्ण कम्बल

(4)संध्या हो जाये
रजनी आगमन
सभी मगन

(५) उड़ती जाती
बंद मुठ्ठी में कैद
भाप बनती

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक /अप्रकाशित

Views: 466

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Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 12, 2013 at 10:48pm
सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें रामशिरोमणी पाठक जी।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 12, 2013 at 4:24pm

सुन्दर हाइकु, बधाई श्री राम शिरोमणि पाठक जी 

Comment by ram shiromani pathak on March 12, 2013 at 12:55pm

बड़े भाई केवल प्रसाद जी आप प्रणाम बोलकर लज्जित ना करे ....प्रणाम तो मुझे करना चाहिए जी ....प्रणाम सहित हार्दिक आभार 

Comment by ram shiromani pathak on March 12, 2013 at 12:53pm

आदरणीय विजय निकोर जी हार्दिक आभार ....

Comment by ram shiromani pathak on March 12, 2013 at 12:52pm

आदरणीय सौरभ सर सब आपके स्नेह की देन है ...अन्यथा मुझे आता ही क्या था.बस आपकी कृपा दृष्टि बने रहे ...प्रणाम सहित हार्दिक आभार  

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 12, 2013 at 5:25am

पाठक जी , सादर प्रणाम ! आपके हाइकू सराहनीय हैं! बहुत-बहुत बधाई !

Comment by vijay nikore on March 12, 2013 at 4:29am

आदरणीय राम जी:

 

हाइकू अच्छे लगे। बधाई।

 

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 12, 2013 at 12:24am

सारे हाइकू सधे हुए और संतृप्त करते हुए हैं.. .

आपके सततऔर नम्र प्रयास से आपकी रचना में सकारात्मक परिवर्तन अत्यंत तोषकारी है.. .

शुभेच्छाएँ.. .

कृपया ध्यान दे...

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