For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिया अब सब्र का भी बुझ रहा ...

‎+++++++++++++++++++++++++++++++
दिया अब सब्र का भी बुझ रहा अंतिम बगावत है
मगर ये रात खुलती ही नहीं लम्बी अमावस है ||

तमन्ना की जमीं पर जब कभी भी घर बनाया था 
हकीकत की लहर ने एक पल में सब डुबा डाला |
मेरी कोशिश मनाने की अभी तक भी निरंतर है 
सभी नाराज होने की वजह को भी मिटा डाला ||

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है ||

वजह क्या थी खता क्या थी मुझे ये तो बता देते 
जरा सी बात पर यूँ चल दिए मुझको सजा देकर |
....मनाने के लिए तुम मांग भी लेते अगर साँसे 
......मुझे मंजूर होती मौत भी तुमको दुआ देकर ||

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||

अगर कल मै कहीं थक कर अचानक मौत मांगूंगा 
मेरी ये आखिरी ख्वाइश समझ कर माफ़ कर देना |
ये जो इल्जाम तुमने बेवजह मुझ पर लगाये हैं 
.....गुनाहों का पुलिंदा खोल कर इन्साफ कर देना ||

निहारा ताज को जिसने- कहा सुन्दर बनावट है 
किसी ने यह नहीं सोचा दफ़न उसमे मोहोब्बत है ||.........मनोज

Views: 716

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 8:37pm

वाह मनोज जी ,बहुत खूब..बेहद सुन्दर तरीके से मोह्हब्बत को उजागर किया है आपने..बधाई स्वीकारें..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 12:11pm

निहारा ताज को जिसने- कहा सुन्दर बनावट है 
किसी ने यह नहीं सोचा दफ़न उसमे मोहोब्बत है ||...वाह सुंदर पंक्तियाँ इस प्रस्तुति हेतु बधाई आपको 

Comment by विजय मिश्र on February 19, 2013 at 12:03pm

  "मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
    न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है || "  ----  यह खासमखास है . सुन्दर 

Comment by Manoj Nautiyal on February 19, 2013 at 9:47am

सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार |सौरभ पांडे जी आपके सुझाव पर मै जुरूर विचार करूँगा | धन्यवाद 

Comment by vijay nikore on February 19, 2013 at 9:15am

मनोज जी:

 

रचना अच्छी लगी।

 

बधाई।

विजय निकोर

Comment by वेदिका on February 19, 2013 at 1:24am

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||

 मासूम ताना .... खूब है !! congratulation.  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 18, 2013 at 9:27pm

मनोज जी, रचना अच्छी लगी, बधाई ।

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 8:18pm

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है || वाह क्या बात है ,,,,,,,,,,,,,,बधाई हो

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 18, 2013 at 8:12pm

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||.......  वाह मनोज जी.. सुन्दर नज्म कही है | बधाईयाँ |

Comment by Rekha Joshi on February 18, 2013 at 7:50pm

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है ||,सुंदर रचना मनोज जी ,बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
May 30

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service