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दिया अब सब्र का भी बुझ रहा ...

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दिया अब सब्र का भी बुझ रहा अंतिम बगावत है
मगर ये रात खुलती ही नहीं लम्बी अमावस है ||

तमन्ना की जमीं पर जब कभी भी घर बनाया था 
हकीकत की लहर ने एक पल में सब डुबा डाला |
मेरी कोशिश मनाने की अभी तक भी निरंतर है 
सभी नाराज होने की वजह को भी मिटा डाला ||

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है ||

वजह क्या थी खता क्या थी मुझे ये तो बता देते 
जरा सी बात पर यूँ चल दिए मुझको सजा देकर |
....मनाने के लिए तुम मांग भी लेते अगर साँसे 
......मुझे मंजूर होती मौत भी तुमको दुआ देकर ||

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||

अगर कल मै कहीं थक कर अचानक मौत मांगूंगा 
मेरी ये आखिरी ख्वाइश समझ कर माफ़ कर देना |
ये जो इल्जाम तुमने बेवजह मुझ पर लगाये हैं 
.....गुनाहों का पुलिंदा खोल कर इन्साफ कर देना ||

निहारा ताज को जिसने- कहा सुन्दर बनावट है 
किसी ने यह नहीं सोचा दफ़न उसमे मोहोब्बत है ||.........मनोज

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Comment

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Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 8:37pm

वाह मनोज जी ,बहुत खूब..बेहद सुन्दर तरीके से मोह्हब्बत को उजागर किया है आपने..बधाई स्वीकारें..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 12:11pm

निहारा ताज को जिसने- कहा सुन्दर बनावट है 
किसी ने यह नहीं सोचा दफ़न उसमे मोहोब्बत है ||...वाह सुंदर पंक्तियाँ इस प्रस्तुति हेतु बधाई आपको 

Comment by विजय मिश्र on February 19, 2013 at 12:03pm

  "मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
    न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है || "  ----  यह खासमखास है . सुन्दर 

Comment by Manoj Nautiyal on February 19, 2013 at 9:47am

सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार |सौरभ पांडे जी आपके सुझाव पर मै जुरूर विचार करूँगा | धन्यवाद 

Comment by vijay nikore on February 19, 2013 at 9:15am

मनोज जी:

 

रचना अच्छी लगी।

 

बधाई।

विजय निकोर

Comment by वेदिका on February 19, 2013 at 1:24am

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||

 मासूम ताना .... खूब है !! congratulation.  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 18, 2013 at 9:27pm

मनोज जी, रचना अच्छी लगी, बधाई ।

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 18, 2013 at 8:18pm

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है || वाह क्या बात है ,,,,,,,,,,,,,,बधाई हो

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 18, 2013 at 8:12pm

मेरे दिल में तुम्हारे नाम की अब भी लिखावट है 
न जाने क्यूँ तुम्हे शक है मुहोब्बत में मिलावट है ||.......  वाह मनोज जी.. सुन्दर नज्म कही है | बधाईयाँ |

Comment by Rekha Joshi on February 18, 2013 at 7:50pm

तुम्हारा रूठना अब लग रहा मुझको क़यामत है 
सभी आदत बदल लूँगा तुम्हे जिन पर शिकायत है ||,सुंदर रचना मनोज जी ,बधाई 

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