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उल्लाला मुक्तिका: दिल पर दिल बलिहार है -संजीव 'सलिल'

उल्लाला मुक्तिका:
दिल पर दिल बलिहार है
संजीव 'सलिल'
*
दिल पर दिल बलिहार है,
हर सूं नवल निखार है..

प्यार चुकाया है नगद,
नफरत रखी उधार है..

कहीं हार में जीत है,
कहीं जीत में हार है..

आसों ने पल-पल किया
साँसों का सिंगार है..

सपना जीवन-ज्योत है,
अपनापन अंगार है..

कलशों से जाकर कहो,
जीवन गर्द-गुबार है..

स्नेह-'सलिल' कब थम सका,
बना नर्मदा धार है..

******

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on February 4, 2013 at 8:27am

प्यार चुकाया है नगद,
नफरत रखी उधार है..

कहीं हार में जीत है,
कहीं जीत में हार है........ वाह अतिसुन्दर.

परम आदरणीय सलिल जी उल्लाला मुक्तिका पर सादर हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by sanjiv verma 'salil' on February 3, 2013 at 5:25pm

रामशिरोमणि जी, राजेश जी, सौरभ जी, संदीप जी, अरुण जी, लक्ष्मण जी, प्राची जी
नव प्रयोग को सराहने हेतु आभार.  सौरभ जी ! आप सही हैं. त्रुटि हेतु खेद है.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 3, 2013 at 2:33pm

बहुत सुन्दर उल्लाला मुक्तिका आदरणीय संजीव सलिल जी. हार्दिक बधाई स्वीकारे. सादर.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 3, 2013 at 12:49pm
दिल पर दिल बलिहार है 
संजीव सलिल बहार है 
शब्दों का भण्डार है 
सुन्दर छंद पढने मिले 
बहुत बहुत आभार है ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on February 3, 2013 at 11:34am

निर्मल सलिल विचार है

शब्द शब्द श्रंगार है

उल्लाला दर्शन भरा

बहुत बहुत आभार है |

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 3, 2013 at 10:54am

वाह वाह वाह सर जी

बहुत बहुत बधाई आपको इस काव्य हेतु वाह


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 3, 2013 at 7:14am

वाह .. उल्लाला का अनुकरणीय उदाहरण !

हर सून - यह हरसू या हरसूँ ही है न ?


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 2, 2013 at 8:54pm

बहुत बढ़िया उल्लाला मुक्तिका हेतु बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on February 2, 2013 at 6:47pm

..बहुत खूब बधाई sir g............

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