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ज्ञान का प्रकाश दे जो दीप वो जलाइए

देश हित वाली बात हिल-मिल सुनाइए
ज्ञान का प्रकाश दे जो दीप वो जलाइए

देश पर विदेशियों की रीत न चलाइए
मान सम्मान अपने देश का बचाइये

अपना संस्कारों वाला देश नव बनाइये
रीत औ रिवाजों वाले गीत अब गाइए

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 12, 2012 at 12:15pm

आप सभी आदरणीय मित्रों और अग्रजों का ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद और सादर आभारी हूँ
समयाभाव की वजह से सबको प्रथक प्रथक टिपण्णी न कर पाने का सदैव ही खेद रहता है
किन्तु आप अपना स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही मेरी रचनाओं पर बनाये रखिये
आपके दिए बेशकीमती समय का ऋणी हूँ

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 11:58am

सुन्दर आलोकित करती सार्थक रचना पर हार्दिक बधाई दीप जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 12, 2012 at 9:35am

संदीप जी सुन्दर छंद बध रचना ..बधाई 

Comment by Albela Khatri on July 12, 2012 at 9:17am

वाह वाह वाह वाह
बहुत खूब संदीप पटेल दीप जी.........

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

__शानदार रचना  !
बधाई !

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 11, 2012 at 11:21pm

बहुत खूब संदीप पटेल जी

आपने इस छंद के माध्यम से राष्ट्रीयता की अलख जगा दी

हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 11, 2012 at 10:23pm

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए

सुन्दर सन्देश संदीप जी 
हो सके तो नहीं... 
उन्हें भी मुख्य धारा में लाइए सिखाईये पढ़ाइये 
विकसित विकासशील प्यारे तब ही कहाइये 
भ्रमर ५ 

 

Comment by Rekha Joshi on July 11, 2012 at 9:41pm

संदीप जी 

छोटों को गरीबों को कभी मत सताइए
हो सके तो उनको भी गले से लगाइए,अति सुंदर रचना ,बधाई 
Comment by deepti sharma on July 11, 2012 at 7:07pm

वाह बहुत खूब 

बधाई आपको 

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