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एक गाना प्यार का ...

सांस  में सुर सनसनाना प्यार का
ज़िन्दगी है  ताना बाना  प्यार का

मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी
आने वाला है  ज़माना  प्यार का

यों तो हर मौसम का अपना रंग है
पर लगे मौसम सुहाना प्यार का

उफ़ जवानी का ये आलम जानेमन
और उस पर उमड़ आना  प्यार का

चीज  है अनमोल, पर बाज़ार में
नहीं मिलेगा चार आना प्यार का

बैठे ठाले यों ही कुछ कुछ लिख दिया
ख़ुद-ब-ख़ुद बन बैठा गाना प्यार का 

है मुकद्दरमन्द जिसको मिल गया
ज़िन्दगी में गुनगुनाना प्यार का

उस घड़ी मत रोकना "अलबेला" को
जब लबों पर हो तराना प्यार का

_______JAI HIND

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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 2, 2012 at 8:14am

वाह वाह अशोक कुमार  रक्ताले साहेब,
बहुत प्यारा अंदाज़ है आपका ....
धन्यवाद

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 2, 2012 at 7:47am

आदरणीय खत्री साहब
                 सादर, बहुत सुन्दर गाया है आपने तराना प्यार का, मन प्रफुल्लित हो गया.
चीज  है अनमोल, पर बाज़ार में
नहीं मिलेगा चार आना प्यार का
आपकी रचना की इन पंक्तियों से मुझे याद आगई अपनी कविता "वाह री सरकार" की कुछ पंक्तियाँ सादर कर रहा हूँ.

देश की साख का टूटता आधार,
चवन्नी बंद रुपया बीमार,
एक सौ तेईस करोड़ का हाहाकार,
जन्मते ही लाखों का उधार,

 

Comment by Albela Khatri on May 31, 2012 at 10:24pm


धन्यवाद महिमाश्री जी,  बहुत बहुत साधुवाद

Comment by MAHIMA SHREE on May 31, 2012 at 10:19pm

यों तो हर मौसम का अपना रंग है
पर लगे मौसम सुहाना प्यार का
चीज  है अनमोल, पर बाज़ार में
नहीं मिलेगा चार आना प्यार का

आदरणीय अलबेला जी .. बहुत ही खूबसूरती से प्यार भरी गज़ल कही .. बधाई स्वीकार करें  

Comment by Albela Khatri on May 31, 2012 at 4:56pm

आपका हार्दिक  आभार योगी सारस्वत जी,
बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Yogi Saraswat on May 31, 2012 at 4:50pm

मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी
आने वाला है  ज़माना  प्यार का

सुन्दरतम शब्द ! बहुत ही बढ़िया अभिव्यक्ति , श्री अलबेला जी !

Comment by Albela Khatri on May 31, 2012 at 3:15pm

धन्यवाद  संदीप कुमार पटेल जी......
शुक्रिया सराहना के लिए

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 31, 2012 at 3:00pm

मौत से कह दूंगा, रुक जा दो घड़ी
आने वाला है  ज़माना  प्यार का

बहुत खूब कहा सर जी .....................बधाई स्वीकार करें इस ग़जल के लिए

Comment by Albela Khatri on May 31, 2012 at 2:25pm

श्रद्धेय  सौरभ जी,  आप सबके सान्निध्य से मेरी लेखनी का सतत  परिष्कार होगा . इसी विश्वास के साथ  आपके  स्नेहिल  सद्व्यवहार के लिए साधुवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 31, 2012 at 1:44pm

भाई अलबेलाजी, आप आश्वस्त रहें.  इस खाल उधेड़ने की प्रक्रिया में हम ओबिओ वाले सिद्धहस्त हैं. इससे कोई बच भी नहीं पाता. :-)))

लेकिन इस खाल उधेड़ू प्रक्रिया का उद्येश्य सकारात्मक हुआ करता है. न कि किसी की हिनाई होती है.  भाई, अभी तक तो यही परंपरा रही है कि ओबिओ मंच पर कोई नाम नहीं बल्कि एक रचना ही बोले.  स्तर के अनुसार ही किसी रचना का नीर-क्षीर होता है.

आप मंच पर बने रहे, सारा कुछ स्वयं स्पष्ट होता जायेगा.  आपकी उत्फुल्ल उपस्थिति हम सभी के लिये प्रसन्नता का कारण बनी है.

कृपया ध्यान दे...

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