For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सरकारी नौकरी ( लघुकथा )

'' घर नहीं चलना , टाइम हो चुका है .'' - मेरे साथी ने मुझसे कहा . मैंने इस कार्यालय में आज ही ज्वाइन किया था .शायद इसीलिए उसने मुझे याद दिलाना चाहा था .
'' मेरी घड़ी पर तो अभी दस मिनट बाकी हैं .'' - मैंने घड़ी दिखाते हुए कहा .
'' वो तो मेरी घड़ी पर भी हैं ."
'' फिर ? ''
'' हम तो ऑफिस की घड़ी के हिसाब से चलेंगे .'' - उसने ऑफिस की घडी की तरफ इशारा किया .
'' लेकिन आए तो हम अपनी घडी के मुताबिक थे .''
'' हाँ , यही तो सरकारी नौकरी है .'' - उसने हंसते हुए कहा और ' देर से आना जल्दी जाना ' गुनगुनाते हुए वह बाहर की तरफ लपका , मैं भी अपना सामान समेटने लगा .

                 * * * * *
                            -----------  दिलबाग विर्क 

Views: 152

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 22, 2012 at 12:22pm

बहुत सुन्दर लघुकथा - बधाई आदरणीय दिलबाग जी.


Comment by dilbag virk on February 17, 2012 at 8:10pm

सभी सुधीजनों का बहुत-बहुत आभार


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 17, 2012 at 3:30pm

बड़े ही हौले से चोट लगाया है, खुबसूरत और संदेशपरक लघुकथा हेतु बधाई दिलबाग जी ।

Comment by आशीष यादव on February 17, 2012 at 8:32am
बिल्कुल सही। हालात को दिखाती यह लघुकथा। बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 17, 2012 at 8:28am

यही तो हो रहा है आजकल सरकारी नोकरी मे प्राइवेट मे देरी कर के दिखाओ ...लघु कथा मे अच्छा व्यंग दिखाई दिया 

Comment by Nazeel on February 17, 2012 at 7:37am
Nice

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 16, 2012 at 9:43pm

यही कारण हैं, सरकारी नौकरियों का साहबी होना.

चटख तथ्य को उजागर करता कथ्य.

बहुत-बहुत बधाई दिलबाग़जी.

Comment by Pradeep Bahuguna Darpan on February 16, 2012 at 9:38pm
Bahut khoob ....
Achchhi Rachna ....
Comment by jaswant gharu on February 16, 2012 at 8:55pm
very good dilbag ji ofice me ese hota h

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
10 minutes ago
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी , अफरोज़ जी , उस्मानी जी ..... और निखार…"
1 hour ago
Manoj kumar shrivastava commented on Manoj kumar shrivastava's blog post क्यों की तुमने आत्महत्या
"आदरणीय समर कबीर जी, उत्साहवर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार, आपका स्नेह बना रहे।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार…"
2 hours ago
रोहिताश्व मिश्रा posted a blog post

एक कोशिश

ये जो राबिता है अपना फ़क़त एक शे'र का है।कोई इक रदीफ़ है तो कोई उसका क़फ़िया है।है अजीब ख़ाहिश-ए-दिल कि…See More
2 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है.... ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar shrivastava's blog post क्यों की तुमने आत्महत्या
"जनाब मनोज कुमार श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"जनाब पंक्जोम "प्रेम"साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,कई…"
2 hours ago
Afroz 'sahr' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आदरणीय पंकजोम प्रेम जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको । रदीफ़,,, "कौन है शायरी" ज़ू, मानी दे…"
2 hours ago
रोहिताश्व मिश्रा commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
"बहुत आभार विजय जी सुरेन्द्र भाई"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a photo
4 hours ago
Manoj kumar shrivastava posted blog posts
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service