For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dilbag virk's Blog (12)

वो सिर्फ बदनाम है

बेवफाई तेरी का ये अंजाम है
गूंजता महफ़िलों में मेरा नाम है |


क्या मिला पूछते हो, सुनो तुम जरा
इश्क का अश्क औ' दर्द इनाम है…
Continue

Added by dilbag virk on May 24, 2012 at 7:42pm — 10 Comments

गजल

कुछ नया इसमें नहीं , दास्तां पुरानी दे गया 

यार मेरा आँख को नमकीन पानी दे गया |


मैं इसे सबको सुनाऊं , लोग सुनते झूम के …
Continue

Added by dilbag virk on May 5, 2012 at 8:18pm — 6 Comments

विवशता ( कविता )

मजदूर दिवस को समर्पित…



Continue

Added by dilbag virk on May 1, 2012 at 11:30am — 7 Comments

मेरा देश ( चोका )

देश मेरे में

अजूबे ही अजूबे

करें नमन

लोग पैर छूकर ।

           …

Continue

Added by dilbag virk on April 2, 2012 at 9:00pm — 5 Comments

गजल

वो खुद में इतना सिमटे-सिमटे थे
जैसे वो दिल को पकड़े-पकड़े थे |


उनको देख हुए थे बेसुध हम तो
क्या बात करें अब मुखड़े, मुखड़े थे |…
Continue

Added by dilbag virk on March 17, 2012 at 7:28pm — 12 Comments

प्यार ( कविता )

तुझे पा लूं
बाहों में भरकर चूम लूं
है यह तो वासना |


प्यार कब…
Continue

Added by dilbag virk on March 8, 2012 at 8:00pm — 4 Comments

हाइकु गीत



 खुद बेवफा

 दूसरों से चाहते

 करें वो वफा |…

Continue

Added by dilbag virk on March 2, 2012 at 8:42pm — 6 Comments

सरकारी नौकरी ( लघुकथा )

'' घर नहीं चलना , टाइम हो चुका है .'' - मेरे साथी ने मुझसे कहा . मैंने इस कार्यालय में आज ही ज्वाइन किया था .शायद इसीलिए उसने मुझे याद दिलाना चाहा था .
'' मेरी घड़ी पर तो अभी दस मिनट बाकी हैं .'' - मैंने घड़ी दिखाते हुए कहा .
'' वो तो मेरी घड़ी पर भी हैं…
Continue

Added by dilbag virk on February 16, 2012 at 8:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल

गरीबी के अब तो जमाने हुए |

मुहब्बत से खाली खजाने हुए |


नहीं मिटता…
Continue

Added by dilbag virk on February 3, 2012 at 5:30pm — 8 Comments

घनाक्षरी



हुए थे सूरमा कई, जो खेले थे जान पर ,

उनके ही प्रताप से , ये देश स्वतंत्र है |
न हो तानाशाह कोई, जनता का राज हो ,
दे संविधान बनाया , इसे गणतन्त्र है |…
Continue

Added by dilbag virk on January 16, 2012 at 10:17pm — 3 Comments

कुंडलिया

नारा अन्ना टीम का , हो सख्त लोकपाल ।

ले आई कमजोर बिल , सरकार चले चाल ।।

सरकार चले चाल , करे है लीपा पोती ।
चलती थी ये चाल , जिन दिनों जनता सोती ।।
जाग उठा है देश , नहीं …
Continue

Added by dilbag virk on January 2, 2012 at 9:59pm — 1 Comment

इस दिल ने नादानी में............

इस दिल ने नादानी में

आग लगा दी पानी में ।

 

वा'दे सारे खाक हुए

आया मोड़ कहानी में ।

 

तेरी याद चली आए

है ये दोष निशानी में…

Continue

Added by dilbag virk on December 1, 2011 at 4:30pm — 9 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" posted a blog post

ग़ज़ल (गणेश जी बागी)

पाँच बरस तक कुछ न कहेंगे कर लो अपने मन की बाबू । बात चलेगी, तब बोलेंगे, अपनी ही थी गलती बाबू…See More
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"सराहना हेतु आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई ।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"जनाब मोहम्मद आरिफ साहब, सराहना हेतु दिल से आभार ।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"ग़ज़ल पर आपकी उत्साहवर्धन करती टिप्पणी हेतु हृदय तल से आभार आदरणीय नीलेश भाई ।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"सराहना हेतु दिल से आभार मोहतरम शेख़ सहजाद उस्मानी साहब ।"
1 hour ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"सराहना एवं उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय हर्ष महाजन साहब ।"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी , नमस्कार।  बहुत ही अच्छी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। "
3 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ग़ुलामी बहुआयामी (अतुकान्त कविता)
"बहुत ही बढ़िया।  बधाई स्वीकार करें। "
3 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकु
"आदरणीय उस्मानी  जी, नमस्कार ।  बहुत बहुत आभार ।  आप सभी गुणीजनों के मार्गदर्शन की…"
3 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकु
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार ।  बहुत बहुत आभार । "
3 hours ago
ram shiromani pathak posted blog posts
6 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

कितने रोगों से बच जाते

जब कागज के ये रुपये सुन्दर सिक्कों में ढल जाते तब सचमुच अच्छा होता कितने रोगों से बच जाते कम से…See More
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service