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मेरा देश ( चोका )

देश मेरे में

अजूबे ही अजूबे

करें नमन

लोग पैर छूकर ।

               धरती यहाँ 

               कहलाती माता

               गुरु का दर्जा

               ईश्वर से ऊपर ।

मान देवता 

हो पूजा प्रकृति की

कर्म जीवन  

फल देता ईश्वर ।

               चाहें दिल से

               करें रिश्तों की कद्र

               छोटों से प्यार

               दें बड़ों को आदर ।

नहीं बनाते 

पत्थर के मकान

लोग यहाँ पे

बनाते सदा घर ।

               न डरें कभी 

               न कभी घबराएं 

               आफत से भी

               मिलें मुस्कराकर ।

लगते मेले

ख़ुशी में नाचें लोग

भांति-भांति के

त्यौहार यहाँ पर ।

               दुःख बटाएँ

               अक्सर दूसरों का

               रहते लोग

               मदद को आतुर ।

क्या बताऊं मैं

विशेषता इसकी

नहीं समाती

कागज के ऊपर ।

                रंग अनेक

                भाषाएँ भी अनेक

                फिर भी एक

                हैरां है विश्व भर

                इसको देखकर ।


                         --------- दिलबाग विर्क 


           ***********************   

जापानी विधा -------- चोका 

वर्ण क्रम ------ 5+7+5+7----------- +7  

           ************************  

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Comment

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Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on April 3, 2012 at 2:22pm

दिलबाग जी,

दिल बाग बाग है,

चोका विधा की,

कुछ खास बात है|.....सादर बधाइयाँ

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 3, 2012 at 1:55pm

भारत वर्ष की पावन भूमि का महिमामयी बखान| चोका विधा से परिचित हो कर अच्छा लगा दिलबाग़ जी|

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 3, 2012 at 7:24am
लवली चौका विर्क जी!
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 9:58pm

bhav sundar. vidha ka main jankar nahi. prastuti hetu badhai.

Comment by jaswant gharu on April 2, 2012 at 9:18pm

d.s ji choka very7 good

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