For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गड़गड़ाकर

खाँसता है

एक बूढ़ा ट्रैक्टर

डगडगाता

जा रहा है

ईंट ओवरलोड कर

सरसराती कार निकली

घरघराती बस

धड़धड़ाती बाइकों ने

गालियाँ दीं दस

कह रही है

साइकिल तक

हो गया बुड्ढा अमर

न्यूनतम का भी तिहाई

पा रहा वेतन

पर चढ़ी चर्बी कहें सब

ख़ूब इसके तन

थरथराकर

कांपता है

रुख हवा का देखकर

ठीक होता सब अगर तो

इस कदर खटता?

छाँव घर की छोड़कर ये

धूप में मरता?

 

स्वाभिमानी

खा न पाया  

आज तक ये माँगकर

--------------------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 926

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Chetan Prakash on June 28, 2021 at 10:40pm

 नमस्कार भाई धर्मेंद्र  कुमार सिंह, 'नवगीत' की भी कोई  विषय वस्तु अनिवार्य  रूप  से  होती है, और  आपका  नवगीत विषय को लेकर अस्पष्ट  है , चूँकि  आप तथाकथित नवगीत  के रचयिता  हैं तो आप  से बेहतर मेरे प्रश्न  का उत्तर  कौन दे सकता है ? सो, बंधु  मैंने  आप से उक्त  जानकारी  की अपेक्षा  की है !  आशा  है,  आप प्रश्न का जवाब  देकर संतुष्ट  करने की कृपा  करेंगे!

 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:21pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'' साहब 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:20pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:18pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Samar kabeer साहब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:16pm

आदरणीय  Chetan Prakash  जी, यदि आप बताया दें कि आपने इस नवगीत का क्या अर्थ निकाला है तो जहां अस्पष्टता है मैं उसका स्पष्टीकरण दे दूंगा 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 27, 2021 at 9:14pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Rahul Dangi Panchal जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 27, 2021 at 9:07pm

आ. भाई धर्मेंद्र जी, सादर अभिवादन । अच्छा गीत हुआ है । हार्दिक बधाई...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on June 27, 2021 at 4:43pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत सृजित हुआ है, बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by Samar kabeer on June 27, 2021 at 12:09pm

जनाब धर्मेन्द्र कुमार जी आदाब, अच्छा नवगीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Chetan Prakash on June 27, 2021 at 8:37am

बंधु, शिल्प की दृष्टि से आपका नवगीत ठीक है, किन्तु इसकी विषय -वस्तु मुझे स्पष्ट नहीं हो पायी, सादर !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
yesterday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service